...तेरी दुनिया मेरे ख्वाबों से कम है

– सुधीरकुमारसिन्हा– – देश के कई राज्यों से आये कवियों ने बांधा समां औरंगाबाद:‘मुझे गम है, तो बस इतना ही गम है, तेरी दुनिया मेरे ख्वाबों से कम है’. सैकड़ों श्रोताओं की मौजूदगी में जिला मुख्यालय में देश के मशहूर कवि व शायर वसीम बरेलवी ने जब ये पंक्तियां पढ़ीं, तो कामता सेवा केंद्र की […]
– सुधीरकुमारसिन्हा–
– देश के कई राज्यों से आये कवियों ने बांधा समां
औरंगाबाद:‘मुझे गम है, तो बस इतना ही गम है, तेरी दुनिया मेरे ख्वाबों से कम है’. सैकड़ों श्रोताओं की मौजूदगी में जिला मुख्यालय में देश के मशहूर कवि व शायर वसीम बरेलवी ने जब ये पंक्तियां पढ़ीं, तो कामता सेवा केंद्र की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन–मुशायरे ने नयी ऊंचाइयां छू लीं.
कवि सम्मेलन–मुशायरा का उद्घाटन जिलाधिकारी अभिजीत सिन्हा व जिला एवं सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र कुमार पांडेय ने संयुक्त से किया. मंगलवार की रात कवि सम्मेलन–मुशायरे में देश के कई जाने माने कवि व शायरों से महफिल सजी थी.
वसीम बरेलवी एक–के–बाद–एक अपनी पंक्तियों के माध्यम से कई सबक दे गये. ‘छोटी–छोटी बातें करके बड़े कहां हो जाओगे, पतली गलियों से निकलो, तो खुली सड़क पाओगे’ जैसी उनकी शायरी श्रोताओं ने पसंद किया. वे यहीं नहीं ठहरे और आगे अपनी अगली शायरी पढ़ी. ‘लगता तो बेखबर सा हूं, लेकिन खबर में हूं, लेकिन तेरी नजर में हूं, तो सबकी नजर में हूं’.
आगे नकारात्मक सोच पर उनका प्रहार था– ‘चला है सिलसिला कैसे ये रातों को मनाने का, तुम्हें हक दे दिया किसने दीयों के दिल दुखाने का’. ‘इरादा छोड़िये अपनी हदो से दूर जाने का, जमाना है जमाने की निगाहों में न आने का’.
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