एसीसी माइंस में बंदी का नोटिस

Updated at : 06 Jun 2014 5:46 AM (IST)
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एसीसी माइंस में बंदी का नोटिस

झींकपानी : एसीसी प्रबंधन ने गुरुवार की शाम विधिवत रूप से राजंका लाइम स्टोन खदान में कार्य पूरी तरह से बंद करने का नोटिस चिपका दिया. महाप्रबंधक एचआर सुरेंद्र सिंह के हस्ताक्षर से जारी इस नोटिस में कहा गया है कि दो-तीन दिनों में प्लांट के क्लीन डिपार्टमेंट, वीआरएम, शॉ मिल व फ्लोटेशन डिपार्टमेंट को […]

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झींकपानी : एसीसी प्रबंधन ने गुरुवार की शाम विधिवत रूप से राजंका लाइम स्टोन खदान में कार्य पूरी तरह से बंद करने का नोटिस चिपका दिया. महाप्रबंधक एचआर सुरेंद्र सिंह के हस्ताक्षर से जारी इस नोटिस में कहा गया है कि दो-तीन दिनों में प्लांट के क्लीन डिपार्टमेंट, वीआरएम, शॉ मिल व फ्लोटेशन डिपार्टमेंट को भी बंद किया जा सकता है.

अगर स्थिति यथावत रही, तो 10 से 15 दिनों में स्थायी कामगारों पर भी रोक लग जायेगी. प्रबंधन ने नोटिस में यह भी साफ कर दिया है कि उसे बाध्य होकर सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन करना पड़ सकता है. इसके तहत स्थिति में सुधार होने तक मजदूरों से काम नहीं लिया जायेगा.

कंपनी के अनुसार खदान में संवैधानिक रूप से काम हो रहा था. इस दौरान राजंका, कोंदोवा व दोकट्टा के ग्रामीणों ने खदान का काम बंद करा दिया. इस कारण फैक्ट्री में उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ा और कंपनी के बंद होने के आसार दिखने लगे हैं. अगर फैक्ट्री बंद होती है, तो 2500 कामगार प्रभावित होंगे. नोटिस में मजदूरों व ग्रामीणों से अपील की गयी है कि खदान का विरोध करने वालों से मिलकर उन्हें समझायें व वस्तुस्थिति से अवगत करायें, ताकि कंपनी को बंद होने से रोका जा सके.

गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से आधारभूत सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीण आंदोलनरत हैं. इसी क्रम में कंपनी की राजकां लाइम स्टोन खदान में काम बंद करा दिया है.

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रबंधन का दावा गुमराह करने वाला है. ऐसा कुछ नहीं है और प्रबंधन ग्रामीणों पर आरोप लगाकर निजी हित साधने में लगा है. 21 मई से राजंका खादान में लाइम स्टोन के खनन पर ग्रामीणों ने रोक लगा रखी है.

इसके बाद से ही ग्रामीण और प्रबंधन आमने-सामने हैं. उधर, सोमवार को पेयजल आपूर्ति की मांग को लेकर जोड़ापोखर के ग्रामीणों ने एसीसी का मुख्य गेट जाम कर दिया. इस दौरान प्रबंधन के प्रयास को ग्रामीणों ने यह कहकर खारिज कर दिया कि पेयजल के साथ लीज पर वार्ता नहीं कर सकते.

इस मुद्दे को लेकर बीडीओ व सीओ को जनप्रतिनिधियों से मिलकर वार्ता करने को कहा गया था. लेकिन किन्हीं कारणों से वार्ता नहीं हो पायी. प्रशासन चाहता है कि एसीसी प्रबंधन व रैयतों के बीच मध्यस्थता कर विवाद का समाधान हो. कानूनी रूप से सही तथ्यों को मानना दोनों पक्षों की जिम्मेवारी है. रैयतों को उनका अधिकारी मिले, साथ ही कंपनी भी बंद न हो, इसका प्रयास होगा.

अजीत शंकर, एडीसी

कंपनी केवल अखबारों के माध्यम से फैक्ट्री बंद करने की खबर फैला रही है. रैयतों ने कंपनी को हमेशा सहयोग किया है. बदले में कंपनी से सिर्फ धोखा मिला है. रैयत व ग्रामीण चाहते हैं कि कंपनी चले, लेकिन रैयतों को नौकरी व उचित मुआवजा भी मिले. कंपनी रैयतों व ग्रामीणों से प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में बात करे. इधर-उधर खबर न फैलाये और न ही दलाल किस्म के लोगों का सहयोग ले. चांदमनी

बालमुचु, झींकपानी प्रखंड प्रमुख

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