भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल का विरोध करेगा महाल
Updated at : 25 Jun 2018 7:07 AM (IST)
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घाटशिला : घाटशिला के महाल हॉल में आयोजित मांझी परगना महाल का दो दिवसीय जिला स्तरीय सम्मेलन रविवार को समाप्त हो गया. सम्मेलन की अध्यक्षता महाल के देश परगना बैजू मुर्मू ने की. बैजू मुर्मू ने कहा समाज संस्कृति और परंपरा से चलेगा. भूमि अधिग्रहण बिल संशोधन का महाल विरोध करेगा और पांच जुलाई की […]
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घाटशिला : घाटशिला के महाल हॉल में आयोजित मांझी परगना महाल का दो दिवसीय जिला स्तरीय सम्मेलन रविवार को समाप्त हो गया. सम्मेलन की अध्यक्षता महाल के देश परगना बैजू मुर्मू ने की. बैजू मुर्मू ने कहा समाज संस्कृति और परंपरा से चलेगा. भूमि अधिग्रहण बिल संशोधन का महाल विरोध करेगा और पांच जुलाई की बंदी का समर्थन करेगा. सम्मेलन में महाल की जिला कमेटी को भी भंग कर दिया गया. कहा कि पारंपरिक व्यवस्था के तहत समाज चलेगा. सम्मेलन में कई प्रस्ताव भी पारित किए गये. सम्मेलन में पूर्वी सिंहभूम के सभी 11 प्रखंड जमशेदपुर, घाटशिला, पोटका, पटमदा, बड़ाम, मुसाबनी, डुमरिया, गुड़ाबांदा, धालभूमगढ़, चाकुलिया, बहरागोड़ा के तरफ परगना, घाट परगना, ग्राम प्रधान, मांझी परगना महाल के प्रखंड अध्यक्ष, सचिव, जिलाध्यक्ष, जिला सचिव, कार्यकर्ता, समाजसेवी आदि ने भाग लिया.
समाज से जुड़े कई मुद्दों पर हुआ मंथन
महाल के देश परगना बैजू मुर्मू ने कहा कि जिला स्तरीय सम्मेलन में दो दिनों तक सामाजिक, राजनीतिक, सभ्यता, संस्कृति और परंपरा को लेकर चर्चा हुई. पहले दिन आदिवासी समाज की संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था, सभ्यता पर चर्चा हुई. दूसरे दिन सीएनटी- एसपीटी एक्ट, भूमि अधिग्रहण बिल, नियोजन नीति, आदिवादी-हरिजन उत्पीड़न, ग्राम विकास समिति और ग्राम सभा पर मंथन किया गया.
ग्राम सभा सर्वोपरि, हो रही अवहेलना : बास्ता सोरेन
सीपीआइ नेता सह महाल के दिशा-निर्देशक बास्ता सोरेन ने कहा कि ग्राम सभा सर्वोपरि है. संवैधानिक अधिकार ग्राम सभा को दिया या है. लेकिन इसकी अवहेलना की जा रही है. संताली भाषा की शिक्षा को बढ़ावा मिले. संताली समाज अपनी बात संताली में लिखित रूप से दे. मातृभाषी रहेगी, तो समाज रहेगा.
ग्रामसभा के अधिकार छीने जा रहे : रामदास सोरेन
पूर्व विधायक रामदास सोरेन ने कहा कि सरकार ग्राम सभा के अधिकार को कुचल रही है. मांझी परगना महाल संताल समाज की परंपरा को बचाने में जुटी है. सभी को मिल कर महाल के संगठन को मजबूत करना है. जल, जंगल और जमीन की लड़ाई है. सरकार जनविरोधी कानून बना रही है.
शिक्षा से व्यवस्था बदलेगी : डॉ सुनीता
चिकित्सक डॉ सुनीता देवदूत सोरेन ने कहा शिक्षा से व्यवस्था बदल सकती है. संताली समाज अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दें. शिक्षा से बेहतर समाज बनेगा. हड़िया-दारू पूजा-पाठ तक रहने दें. इसका सेवन बंद करें, तब समाज के लोग उन्नति करेंगे.
सीएनटी एक्ट समाज का कवच है : देवयानी मुर्मू
जिप सदस्य देवयानी मुर्मू ने कहा कि सीएनटी एक्ट आदिवासी समाज का कवच है. इसके साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए. छेड़छाड़ हुआ तो आदिवासियों की जमीन नहीं बचेगी.
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