ईसाई धर्म अपनाया, तो सरना धर्म के कब्रिस्तान में नहीं दफनाने दिया शव
Updated at : 06 Jun 2018 6:10 AM (IST)
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हाटगम्हरिया प्रखंड के आमडीहा गांव का मामला अन्यत्र शव दफनाने के लिए राजी होने पर मामला हुआ शांत जगन्नाथपुर : सरना धर्म के लोगों ने अपने कब्रिस्तान (ससन दिरी) में ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवार के मुखिया का शव नहीं दफनाने दिया. हालांकि शव दफनाने के लिए कब्र तक खोद लिया गया था. इसी बीच […]
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हाटगम्हरिया प्रखंड के आमडीहा गांव का मामला
अन्यत्र शव दफनाने के लिए राजी होने पर मामला हुआ शांत
जगन्नाथपुर : सरना धर्म के लोगों ने अपने कब्रिस्तान (ससन दिरी) में ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवार के मुखिया का शव नहीं दफनाने दिया. हालांकि शव दफनाने के लिए कब्र तक खोद लिया गया था. इसी बीच ग्रामीणों को जानकारी मिलने पर उन्होंने विरोध शुरू कर दिया. सरना धर्म मानने वालों के विरोध को देखते हुए शव कब्रिस्तान से बार दफनाना पड़ा. घटना हाटगम्हरिया प्रखंड के आमडीहा गांव में मंगलवार सुबह की है. घटना को लेकर तनाव की स्थिति बन गयी थी, लेकिन शव बाहर दफनाने के लिए राजी होने के बाद मामला शांत हो गया.
ईसाई धर्म अपनाने के बाद सामाजिक कार्यों से कर दिया था अलग
जानकारी के अनुसार ईसाई सामाजिक संगठन के प्रखंड अध्यक्ष सुजीत चातोंबा के परिवार वालों ने सरना धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया था. इसके कारण सरना धर्म के लोगों में रोष था. उन्होंने उक्त परिवार को अपने सामाजिक कार्यों से अलग कर दिया था.
परंपरा से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं
आदिवासी हो समाज युवा महासभा ने कहा कि आदिवासियों की परंपरा से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे. गांव-गांव में धार्मिक जन जागरण चलाकर धर्म परिवर्तन नहीं करने के लिए लोगों को चेताया जायेगा.
मौके पर मुंडा रासिका कोड़ा, आदिवासी हो समाज युवा महासभा जिला संयोजक गलाय चातोम्बा, जगन्नाथपुर अनुमंडल
अध्यक्ष मंजीत कोड़ा , नोवामुंडी प्रखंड अध्यक्ष बलराम लागुरी, हाटगम्हरिया प्रखंड अध्यक्ष रोशन गागराई, लालसिंह चातोम्बा, रामू चातोम्बा, रमेश चातोम्बा, प्रधान चातोम्बा, सागर बान्हदा आदि उपस्थित थे.
ग्रामीणों ने कहा- धर्म के विरुद्ध कार्य नहीं होगा
सुजीत के पिता डिकुल चातोम्बा की मंगलवार की सुबह मौत हो गयी. उन्होंने पिता का शव सरना धर्म के कब्रिस्तान (ससन दिरी) में दफनाने की तैयारी की. परिवार वालों ने कब्र तक खोद लिया था. शव दफानाने की तैयारी चल रही थी. इसी बीच गांव वालों को खबर लग गयी. उन्होंने इसका विरोध किया. आदिवासी हो समाज युवा महासभा को इसकी जानकारी दी. आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पदाधिकारी पहुंचे. सभी ने सरना धर्म के ससन दिरी में ईसाई धर्म के लोगों का शव दफनाने देने से इन्कार कर दिया. ग्रामीणों का कहना था कि यह सरना धर्म के विरुद्ध है. शव अन्यत्र दफनाये उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. विरोध को देख ईसाई धर्म के लोगों ने शव अन्यत्र दफनाने का निर्णय लिया. इसके बाद मामला शांत हुआ.
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