आदिवासी व हिंदू को अलग करने की साजिश दोनों ही हैं प्रकृति - पूजक
Updated at : 27 Feb 2018 5:02 AM (IST)
विज्ञापन

मनोहरपुर/आनंदपुर : आदिवासी को हिंदू से अलग बता कर साजिश रची जा रही है. दोनों धर्मों को आपस में दूर करना चाहते है, ताकि पहले हिंदू और आदिवासी अलग हो जाये और बाद में उन्हें धर्मांतरण करा दिया जाये. आदिवासी और हिंदू आदि काल से एक दूसरे के अभिन्न अंग है, दोनों में पूर्णतः समानता […]
विज्ञापन
मनोहरपुर/आनंदपुर : आदिवासी को हिंदू से अलग बता कर साजिश रची जा रही है. दोनों धर्मों को आपस में दूर करना चाहते है, ताकि पहले हिंदू और आदिवासी अलग हो जाये और बाद में उन्हें धर्मांतरण करा दिया जाये. आदिवासी और हिंदू आदि काल से एक दूसरे के अभिन्न अंग है, दोनों में पूर्णतः समानता है. उक्त बातें जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने विश्व कल्याण आश्रम में प्रेस वार्ता में कही.
उन्होंने कहा कि आदिवासी प्रकृति की पूजा करते हैं तो हिंदू धर्म में भी प्रकृति की पूजा की जाती है. हिंदू धर्म में नदियों, पीपल व वटवृक्ष की पूजा की जाती है. आदिवासी सिंगबोंगा की पूजा करते हैं, वे सूर्य के उपासक होते हैं. उन्होंने कहा कि रामकथा की लोकप्रियता को देखते हुए विश्व कल्याण आश्रम में वर्ष 1988 में रामायण का विमोचन मुंडारी भाषा में किया गया था.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




