आठ माह में 52 शिशुओं की गर्भ में हुई मौत
Updated at : 27 Aug 2017 6:11 AM (IST)
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चाईबासा सदर अस्पताल की व्यवस्था गर्भवती महिला को टायफायड, मलेरिया, टीबी खून की कमी से गयी बच्चों की जान जुलाई माह में सबसे अधिक हुई बच्चों की मौत कम उम्र में ही मां बनने के कारण कई बच्चों की गयी जान चाईबासा : सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में बीते आठ माह में कुल 52 […]
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चाईबासा सदर अस्पताल की व्यवस्था
गर्भवती महिला को टायफायड, मलेरिया, टीबी खून की कमी से गयी बच्चों की जान
जुलाई माह में सबसे अधिक हुई बच्चों की मौत
कम उम्र में ही मां बनने के कारण कई बच्चों की गयी जान
चाईबासा : सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में बीते आठ माह में कुल 52 शिशुओं की मौत मां के पेट (गर्भ) में हो गयी है. वहीं गर्भवती महिलाओं की मलेरिया, टायफायड, टीबी, खून की कमी होने से मौत हुई है. कम उम्र में मां बनने से भी कई बच्चों की जान चली गयी.
घर में भी कई मामले
पेट में 52 बच्चों की मौत का आंकड़ा सिर्फ संस्थागत प्रसव से है. इस जिले में सरकारी आंकड़े के अनुसार अभी 60 से 70 फीसदी संस्थागत प्रसव हो रहे हैं. जिन मां ने घर में मृत बच्चे को जन्म दिया होगा, उस आंकड़ें को जोड़े तो पेट में बच्चों की मौत का आंकड़ा बढ़ जायेगा.
गर्भावस्था में प्राथमिक जांच नहीं होना कारण
पेट में बच्चों के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा है. लगातार ऐसी मौत की संख्या बढ़ रही है. गर्भावस्था के दौरान तीन फेज में गर्भवती महिला के स्वास्थ्य की जांच करानी होती है. गर्भवती होने के दौरान खून, पेशाब, वजन, हिमोग्लोबिन की जांच करानी होती है. यह जांच नहीं होने के कारण मां की वर्तमान स्थिति का पता नहीं लग पाता है, और धीरे-धीरे बच्चे पर इसका प्रभाव पड़ने लगता है.
जागरुकता की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं का संपूर्ण जांच व इलाज नहीं हो पाता है. गर्भवती महिला में मलेरिया, टीवी, खून की कमी, टायफायड आदि बीमारी होने के कारण इसका प्रभाव बच्चे पर पड़ता है. कई बार ऐसी स्थिति में बच्चे की मौत हो जाती है.
– डॉ बीके पंडित, चिकित्सक, सदर अस्पताल
बच्चों की मौत का आंकड़ा
माह मृतक बच्चों की संख्या
जनवरी 08
फरवरी 05
मार्च 11
अप्रैल 03
मई 05
जून 05
जुलाई 09
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