अब जाम छलकाना होगा महंगा! मिडिल-ईस्ट युद्ध के कारण शराब और बीयर की कीमतों में 15% बढ़ोतरी की मांग

Updated at : 25 Mar 2026 6:14 PM (IST)
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Liquor Beer Price Hike

शराब और बीयर की कीमतों में 15% इजाफे की मांग (फोटो/Canva)

Liquor Beer Price Hike: मिडिल-ईस्ट युद्ध के चलते कच्चे माल और पैकेजिंग की लागत बढ़ने से शराब और बीयर कंपनियां संकट में हैं. कंपनियों ने राज्य सरकारों से कीमतों में 15% इजाफे की मांग की है.

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Liquor Beer Price Hike: मिडिल-ईस्ट (मध्य-पूर्व) में जारी तनाव की आग अब भारत के आबकारी विभाग और शराब प्रेमियों की जेब तक पहुँचने वाली है. कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और चरमराती सप्लाई चेन से परेशान होकर देश के दो सबसे बड़े उद्योग निकायों ने राज्य सरकारों से शराब और बीयर की कीमतों में तत्काल 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने की अपील की है. कंपनियों का कहना है कि अगर कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, तो उनके लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल हो जाएगा.

कितनी बढ़ेगी कीमत ?

शराब उद्योग के शीर्ष निकाय ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज’ (CIABC) ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) के उत्पादों के दामों में संशोधन की मांग की है.

संगठन के महानिदेशक अनंत एस. अय्यर के मुताबिक, वे प्रति केस (9 लीटर) पर 100 से 150 रुपये की वृद्धि चाहते हैं. दूसरी ओर, ‘ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (BAI) ने, जो यूनाइटेड ब्रुअरीज और कार्लसबर्ग जैसी दिग्गज बीयर कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है, प्रति केस (12 बोतल) पर 25 से 30 रुपये की बढ़ोतरी की मांग की है.

क्यों बढ़ रहे हैं दाम ?

इस संकट की मुख्य वजह मिडिल-ईस्ट में बढ़ता युद्ध है, जिसने वैश्विक सप्लाई चेन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने पैकेजिंग और ढुलाई के खर्च को आसमान पर पहुंचा दिया है. बोतलों के ढक्कन में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक (PP/HDPE) के दाम फरवरी से अब तक 31% से 36% तक बढ़ चुके हैं, क्योंकि ईरान से होने वाला आयात लगभग ठप है. इसके अलावा, एल्युमीनियम और कागज की कीमतों में भी भारी उछाल आया है, जिससे बोतलों की सील और पैकिंग बॉक्स काफी महंगे हो गए हैं.

सरकार के लिए भी बड़ा खतरा

शराब और बीयर उद्योग न केवल रोजगार का बड़ा जरिया है, बल्कि यह सरकारी खजाने में हर साल करीब 3.50 लाख करोड़ रुपये का राजस्व (Revenue) भी जमा करता है. BAI के महानिदेशक विनोद गिरी ने चेतावनी दी है कि कई राज्यों में बीयर कंपनियां इस वक्त घाटे में चल रही हैं और बिना मूल्य वृद्धि के उनका अस्तित्व खतरे में है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि राजस्व की सुरक्षा और उद्योग को बचाने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला तुरंत लिया जाए ताकि बोझ केवल कंपनियों पर न पड़े.

कांच की बोतलों का संकट और ऊर्जा की कमी

शराब उद्योग के लिए सबसे बड़ी चुनौती कांच की बोतलों की कमी और उनकी बढ़ती कीमत है. फिरोजाबाद के ग्लास हब को होने वाली एलएनजी (LNG) सप्लाई में भारी कटौती की गई है, जिससे कांच की फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर हैं.

इसके कारण कांच के सप्लायर अब 12% तक दाम बढ़ाने के संकेत दे रहे हैं. साथ ही, कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम इस महीने ₹144 बढ़कर ₹1,973.50 हो गए हैं और इंडोनेशियाई कोयला भी 20% महंगा हो गया है, जिससे शराब बनाने की पूरी प्रक्रिया की लागत कई गुना बढ़ गई है.

लागत में कितनी हुई बढ़ोतरी ?

कच्चा मालबढ़त (लगभग)मुख्य कारण
प्लास्टिक (PP/HDPE)31% – 36%ईरान से आयात बंद होना
PET रेजिन40%कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
कोयला (इंडोनेशिया)20%वैश्विक ऊर्जा संकट
कांच की बोतलें8% – 12%गैस सप्लाई में कटौती और महंगा सिलेंडर

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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