सारंडा के गांवों में न करें विकास कार्य
Updated at : 04 Jul 2017 5:19 AM (IST)
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किरीबुरू : डीएफओ ने उपायुक्त व जिले के सभी बीडीओ को पत्र लिखकर कहा किरीबुरू : वन विभाग ने सारंडा जंगल के अंदर बसे दर्जनों गांवों में विकास कार्यों पर रोक लगाने की मांग प्रशासन से की है. क्षेत्र के डीएफओ ने डीसी तथा जिले के सभी बीडीओ को इस संबंध में पत्र लिखकर इन […]
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किरीबुरू : डीएफओ ने उपायुक्त व जिले के सभी बीडीओ को पत्र लिखकर कहा
किरीबुरू : वन विभाग ने सारंडा जंगल के अंदर बसे दर्जनों गांवों में विकास कार्यों पर रोक लगाने की मांग प्रशासन से की है. क्षेत्र के डीएफओ ने डीसी तथा जिले के सभी बीडीओ को इस संबंध में पत्र लिखकर इन गांवों को ‘अवैध’ बताते हुए कहा है कि वहां विकास कार्य न किये जायें. गौरतलब है कि जंगल के अंदर बसे कलैता, मर्चिगडा, जुम्बईबुरू, बालेहातु, कादोडीह, धर्नादिरी, चेरवालोर, होंजोरदिरी, झाड़बेडा़,
राटाटोंटोगडा़, गुंडीजोडा, दिवेंद्री आदि दर्जनों गांव सरकार की सूची में शामिल नहीं है. अर्थात् ये गांव अभी तक राजस्व गांव नहीं हैं. वन विभाग इन गांवों को अवैध गांवों की श्रेणी में रखता है क्योंकि वह मानता है कि जंगलों की अवैध कटाई कर ये गांव बसे हुए हैं.
आधार कार्ड में अपने गांव का नाम नहीं : चेरवालोर, जुम्बाईबुरू, धर्नादिरी समेत सात गांवों के ग्रामीणों के पास पहचान पत्र के नाम पर सिर्फ वोटर कार्ड है. हाल के दिनों में इनका आधार कार्ड बना है, लेकिन जिस गांव में ये लोग बसे हैं, उन गांवों का नाम उनके आधार कार्ड पर नहीं है. गांव के पता के नाम पर करमपदा आदि गांवों का पता अंकित है.
2014 में पहली बार डाला था वोट : चेरवालोर, जुम्बाईबुरू, धर्नादिरी समेत सात गांवों के ग्रामीणों ने पहली बार वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वोट डाला था. तत्कालीन उपायुक्त अबुबक्कर सिद्दीकी पी की पहल पर इन गांवों के ग्रामीण लोकतंत्र के पर्व में शामिल हुए थे. डीसी ने उस समय सरकार को इन गांवों को राजस्व ग्राम बनाने की अनुशंसा की थी. लेकिन, सरकार की ओर से इस पर अब तक कोई पहल नहीं की गयी.
दर्जन भर से ज्यादा गांव बसे हैं सारंडा जंगल में
सरकार की सूची में नहीं हैं ये गांव
वन विभाग इन गांवों को मानता है अवैध
ऐसे तमाम गांवों में विकास योजनाओं को चालू नहीं करने का आग्रह किया गया है. अगर चालू करते हैं भी चालू करने नहीं दिया जायेगा, क्योंकि जो गांव सरकार की सूची में है ही नहीं, वहां के लोग ग्राम सभा कैसे कर सकेंगे. जंगल काट बसे गांवों को वनाधिकार पट्टा भी नहीं दिया जायेगा. सरकार की तरफ से नया नोटिफिकेशन आता है तो यह भविष्य की बात है.
सतीशचंद्र राय, डीएफओ, सारंडा
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