बिहार के इस जिले में जल्द शुरू होगा राज्य का दूसरा रोपवे, वाणावर पहाड़ की चोटी तक मिनटों में पहुंचेंगे टूरिस्ट

Updated at : 27 Mar 2026 8:15 PM (IST)
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jehanabad ropeway news

अंतिम चरण पर रोपवे का काम

Bihar News: राजगीर के बाद अब जहानाबाद में बिहार का दूसरा रोपवे जल्द शुरू होने वाला है. वाणावर पहाड़ पर बन रहा यह प्रोजेक्ट अंतिम चरण में है, जिससे श्रद्धालु और पर्यटक कुछ ही मिनटों में पहाड़ी की चोटी तक पहुंच सकेंगे.

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Bihar News: बिहार आने वाले पर्यटकों के लिए अच्छी खबर है. राजगीर के बाद अब जहानाबाद में दूसरा रोपवे जल्द शुरू होने वाला है. वाणावर पहाड़ पर बन रहा यह रोपवे अंतिम चरण में है और मई तक इसे चालू करने का लक्ष्य रखा गया है.

90 प्रतिशत काम पूरा, जल्द होगा ट्रायल

करीब 24 करोड़ की लागत से बन रहे इस रोपवे का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. लोअर और अपर स्टेशन तैयार हैं, चारों टावर बन चुके हैं और तार बिछाने का काम अंतिम चरण में है. अधिकारियों के मुताबिक, जल्द ही ट्रॉली का ट्रायल शुरू किया जाएगा. एक ट्रॉली में 8 से 10 यात्री आसानी से सफर कर सकेंगे.

पहाड़ की चोटी तक आसान सफर

यह रोपवे हथियाबोर क्षेत्र से सिद्धेश्वर नाथ मंदिर तक बनाया जा रहा है. अभी मंदिर तक पहुंचने के लिए लोगों को पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को काफी परेशानी होती है. रोपवे शुरू होने के बाद यह यात्रा कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी.

दो अलाइनमेंट से बढ़ेगी सुरक्षा

रोपवे को दो अलग-अलग अलाइनमेंट में विकसित किया जा रहा है, जिससे संचालन और सुरक्षा दोनों बेहतर होंगे. यह तकनीकी रूप से भी काफी आधुनिक और सुरक्षित परियोजना मानी जा रही है.

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वाणावर को पर्यटन सर्किट से जोड़ना है. बोधगया और राजगीर आने वाले पर्यटक अब जहानाबाद भी पहुंच सकेंगे. यहां मौजूद मौर्यकालीन गुफाएं और बाबा सिद्धनाथ मंदिर इस क्षेत्र को खास बनाते हैं. सावन में यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए आते हैं.

इतिहास, आस्था और प्रकृति का संगम

रोपवे से सफर करते हुए पर्यटक पहाड़ की ऊंचाई से वाणावर की हरियाली, प्राकृतिक सुंदरता और फल्गु नदी के मनमोहक दृश्य का आनंद ले सकेंगे. यह जगह भविष्य में एक आकर्षक टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित हो सकती है.

रोजगार के नए अवसर

रोपवे शुरू होने से स्थानीय लोगों को भी फायदा होगा. पर्यटन बढ़ने से छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और गाइड्स को रोजगार मिलेगा, जिससे इलाके की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.

2015 में रखी गई थी आधारशिला

इस परियोजना की आधारशिला 2015 में रखी गई थी, लेकिन वन विभाग की अनुमति और स्थानीय समस्याओं के कारण काम में देरी हुई. 2022 के बाद काम ने रफ्तार पकड़ी और अब यह अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है.

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लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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