सरायकेला में वट सावित्री व्रत की धूम, सुहागिन महिलाएं करेंगी पति की लंबी उम्र की कामना 

Published by : Priya Gupta Updated At : 15 May 2026 1:14 PM

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वट सावित्री व्रत की धूम

Seraikela Kharsawan News: सरायकेला-खरसावां में वट सावित्री व्रत को लेकर सुहागिन महिलाएं तैयार हैं. पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए महिलाएं विधि-विधान से व्रत और पूजा करेंगी. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Seraikela Kharsawan News: सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए शनिवार को वट सावित्री की व्रत रखेंगी. सरायकेला, खरसावां, चांडिल, बडाबांबो के साथ विभिन्न जगहों पर महिलाएं 16 मई को वट सावित्री की पूजा करेंगी. वट सावित्री व्रत को लेकर व्रतियों ने आवश्यक सामाग्रियों की खरीदारी की. वट सावित्री का व्रत भी महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि के लिए करती हैं.

वट सावित्री व्रत की पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएं

ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को महिलाएं वट सावित्री व्रत रखती हैं. इस दिन वट वृक्ष (बरगद) के नीचे पूजन किया जाता है. वट वृक्ष पर सुहागिनें जल चढ़ा कर कुमकुम, अक्षत लगाती हैं. फिर पांच, ग्यारह, इक्कीस या इक्यावन बार वृक्ष की परिक्रमा करके वट में रोली बांधती कर पति की लंबी उम्र की मुरादें मांगती हैं. पूरे विधि विधान से पूजा करने के बाद सती सावित्री की कथा सुनती हैं. कहा जाता है कि इस कथा को सुनने से सौभाग्यवती महिलाओं को अखंड सौभाग्य की की प्राप्ति होती है. कई जगहों पर घरों में भी बरगद की डाली गाड़कर भी पूजा अर्चना की जाती है. पति की लंबी आयु के लिए महिलाएं यह व्रत और पूजा करती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि पूर्वक वट सावित्री व्रत और पूजन से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति सहित संतान की कामना भी पूरी होती है. वट सावित्री के व्रत में फलों का ही भोग चढ़ाने और प्रसाद के रूप में फलों का ही सेवन करने का प्रचलन है. 

कैसे पड़ा वट सावित्री नाम ?

पौराणिक मान्यताओं की मानें तो सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को जीवित किया था. इसलिए इस व्रत का नाम वट सावित्री पड़ा. वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ का महत्व अधिक है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, सनातन संस्कृति में ऐसा माना जाता है कि बरगद के पेड़ पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है. इसके सुहागिन महिलाएं उपवास रख कर इस व्रत में सावित्री-सत्यवान की पुण्य कथा का श्रवण किया जाता हैं.

ये है पूजा विधि 

इस दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं और खूब सजती-संवरती हैं. सबसे पहले भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इसके बाद वट वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित कर पूजा अर्चना की जाती है. माता सावित्री को वस्त्र और सोलह श्रृंगार चढ़ाया जाता है. फल-फूल अर्पित करने के बाद रोली से पेड़ की परिक्रमा किया जाता है. फिर व्रत कथा को ध्यानपूर्वक सुन कर दिन भर व्रत रखा जाता है.

वट सावित्री व्रत को लेकर बढ़े फलों के दाम

वट सावित्री व्रत को लेकर शुक्रवार को सरायकेला-खरसावां जिला में फलों के दाम में उछाल देखने को मिला. वट सावित्री व्रत में विभिन्न प्रकार के फलों का उपयोग होता है. व्रती व्रत रख कर फलों का ही सेवन करती है. इस कारण फलों की काफी मांग रही. फलों की मांग अधिक होने के कारण ही दाम बढ़ गए है. लोगों ने भी महंगाई के बावजूद व्रत को लेकर फलों की खरीदारी की.  

खरसावां के डेली मार्केट में लगा फल का दुकान
खरसावां के डेली मार्केट में लगा फल का दुकान

सरायकेला-खरसावां में बिक्री हो रहे फलों के दाम 

फल : दाम

  • सेव : 200 रुपए किलो
  • अनार : 160 रुपए किलो
  • अंगूर : 200 रुपए किलो
  • संतरा : 160 रुपए किलो
  • तरबूज : 20 रुपए किलो
  • मोसम्मी : 100 रुपए किलो
  • केला : 60-80 रुपए किलो
  • डाव : 60 रुपए प्रति पीस
  • नारियल : 30 -40 रुपए प्रति पीस
  • अमरुद : 120 रुपए किलो
  • आम : 60-80 रुपए प्रति किलो
  • लिची : 200 रुपए प्रति किलो
  • खजूर: 200 रुपए प्रति किलो

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लेखक के बारे में

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प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह झारखंड बीट पर काम कर रही हैं, जहां वह खबरों को आसान भाषा में लिखती हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल बीट पर काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने हेल्थ, रेसिपी, मेहंदी डिजाइन और फैशन से जुड़ी खबरों पर काम किया. इसके अलावा, उन्होंने नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में भी काम किया है. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से और मास्टर की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड से पूरी की है.

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