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पानी रोको पौधा रोपो अभियान : खूंटी की महिलाओं ने 115 एकड़ जमीन पर गड्ढा खोद हरियाली की रखी बुनियाद

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
गुना गांव में आम बागवानी के लिए गड्ढा खोदतीं सखी मंडल की दीदियां.
गुना गांव में आम बागवानी के लिए गड्ढा खोदतीं सखी मंडल की दीदियां.
फोटो : JSLPS.

खूंटी : हेमंत सरकार की महत्वाकांक्षी पानी रोको पौधा रोपा अभियान की शुरुआत के साथ ही असर भी दिखने लगा है. 1 जून से शुरू हुए इस अभियान को अभी कुछ ही दिन बीते हैं कि सखी मंडल की महिलाओं ने खूंटी जिला अंतर्गत कर्रा प्रखंड के दो गांव गुनी और मानपुर के करीब 115 एकड़ जमीन पर जल संचय के लिए ट्रीटमेंट किया, वहीं आम की बागवानी के लिए गड्ढे भी खोदे गये. इन महिलाओं ने नारा दिया 'सखी मंडलों ने ठाना है, गांव का पानी बाहर नहीं जाने देना है'. पढ़ें समीर रंजन की यह रिपोर्ट.

बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत पानी रोको पौधा रोपा अभियान की शुरुआत खूंटी जिले के गुना गांव से हुई है. इस गांव का चयन इसलिए हुआ क्योंकि यहां की ग्रामीण महिलाएं जलस्तर में वृद्धि और जल संचय की महत्ता को भलीभांति समझ चुकी थीं. कुछ दिनों में ही इसका परिणाम भी दिखने लगा.

ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़ीं सखी मंडल की दीदियों ने सरकार की महत्वाकांक्षी पानी रोको पौधा रोपो अभियान को धरातल पर उतारने को ठानी. 1 जून 202 से शुरू हुए इस अभियान को अभी चंद दिन ही बीते थे कि खूंटी जिला अंतर्गत कर्रा प्रखंड के गुनी और मानपुर गांव की दीदियों ने करीब 115 एकड़ में जल संचय के लिए ट्रीटमेंट और आम की बागवानी के लिए गड्ढे खोदें.

एक काम दो फायदे

कर्रा प्रखंड अंतर्गत घुनसुली पंचायत के गुनी गांव में 6 सखी मंडलों की 75 दीदियों ने खुद ही 90 एकड़ जमीन पर गड्ढे खोदे. इसमें जल संचयन के साथ- साथ बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत आम की बागवानी होनी है. आम की बागवानी के लिए दीदियों ने 5 एकड़ में 960 गड्ढे खोदें. इन गड्ढों में आम के पौधे लगाये जायेंगे. इसके अलावा शेष जमीन पर जल संचयन के तहत ट्रेंच कम बंड (TCB), लूज बोल्डर स्ट्रक्चर (LBS), कैटल प्रोटेक्शन ट्रेंच (CPT), सोख्ता गड्ढा आदि के लिए दीदियों ने गड्ढे खोदें.

पहले विरोध, फिर मिला साथ

गुनी गांव की सक्रिय महिला सदस्य तनीषा हस्सा बताती हैं कि इस काम के लिए शुरुआत में गांव के अन्य लोगों का विरोध भी झेलना पड़ा था. लेकिन, दीदियों ने हिम्मत नहीं हारी और गड्ढे खोदने के कार्य में लगी रहीं. ग्रामसभा व महिला ग्राम संगठन के निरंतर प्रयास के बाद ग्रामीण भी इन दीदियों को सहयोग करने लगें.

जल संचय के लिए बनाये गये ट्रेंच कम बंड (बायें) और बारिश के बाद टीसीबी में जमा पानी (दायें).
जल संचय के लिए बनाये गये ट्रेंच कम बंड (बायें) और बारिश के बाद टीसीबी में जमा पानी (दायें).
फोटो : JSLPS.

ट्रीटमेंट का दिखने लगा असर

खूंटी जिले में अब तक सखी मंडलों की दीदियों के माध्यम से करीब 300 एकड़ भूमि का ट्रीटमेंट किया जा चुका है. इसका असर भी दिखने लगा. पिछले दिनों की बारिश से निर्मित ट्रेंच कम बंड (TCB), लूज बोल्डर स्ट्रक्चर (LBS), कैटल प्रोटेक्शन ट्रेंच (CPT), सोख्ता गड्ढा आदि में पानी भरने लगे. इन जगहों पर पानी भरा देख अब ग्रामीण आगामी दिनों में जलस्तर की वृद्धि और खेतों के लिए अधिक पानी मिलने के प्रति आश्वस्त दिखें.

जल संचय व आम बागवानी के लिए गड्ढा खोदने में लगीं मानपुर गांव की महिलाएं व पुरुष.
जल संचय व आम बागवानी के लिए गड्ढा खोदने में लगीं मानपुर गांव की महिलाएं व पुरुष.
फोटो : JSLPS.

मानपुर गांव में 25 एकड़ जमीन पर हुआ ट्रीटमेंट

कर्रा प्रखंड का एक और गांव है मानपुर. डुमागारी पंचायत के तहत इस गांव की सखी मंडल की दीदियों ने गांवों में हरियाली व जल संचय में बेहतर कार्य किया है. इन दीदियों ने अपने- अपने गांव में रहते हुए उत्प्रेरक (Catalyst) की भूमिका निभायी है. इस गांव की दीदियों ने 25 एकड़ जमीन का उपचार किया है. इस गांव के अधिकतर लोग पिछले कई समय से अपने खेत व जंगलों में ट्रेंच कम बंड (TCB), फार्म बंड आदि के निर्माण में जुटे हैं. इन ग्रामीणों का एकमात्र उद्देश्य है कि खेत का पानी खेत में ही रहे. इस कार्य में सखी मंडल की दीदियों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण रही है.

आपको बता दें कि बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत आम के पौधे लगाये जाने हैं. एक एकड़ में 192 आम के पौधे लगेंगे. वहीं, बागवानी के चारों ओर 80 इमारती लकड़ी के पौधे लगेंगे. आम के पौधे के लिए 3 फीट का गड्ढा खोदा जाता है. जमीन से एक फीट की मिट्टी को पौधों की भराई के लिए रखा जाता है, वहीं दो फीट की मिट्टी को बागवानी के किनारे-किनारे लगाने का प्रावधान है. आम के पौधे के एक से दूसरी की दूरी 10 फीट रखी जाती है.

दूसरी ओर, नीलांबर- पीतांबर जल समृद्धि योजना के तहत ट्रेंच कम बंड (TCB), लूज बोल्डर स्ट्रक्चर (LBS), कैटल प्रोटेक्शन ट्रेंच (CPT), सोख्ता गड्ढा आदि का निर्माण कर जल संचय पर जोर दिया जा रहा है.

मनरेगा के तहत हर एक को मिले काम : आलमगीर आलम

झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि मनरेगा के तहत प्रवासी व अप्रवासी लोगों को काम मुहैया कराया जा रहा है. सरकार की कोशिश है कि हर एक को काम मिले. सरकार की यह भी कोशिश है कि लोगों को रोजगार के साथ- साथ स्वरोजगार की ओर भी प्रोत्साहित किया जाये. इस दिशा पर भी कार्य हो रहे हैं. मनरेगा के तहत जल संचयन और आम बागवानी के कार्य में सखी मंडल की दीदियों का सहयोग बेहतर परिणाम देगा. सखी मंडल की दीदियां गांव- पंचायत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

खेतों की नमी बरकरार रखने में जुटीं दीदियां : शैलेश रंजन

जेएसएलपीएस, खूंटी के जिला कार्यक्रम प्रबंधक शैलेश रंजन ने कहा कि जेएसएलपीएस की पूरी टीम महिला सशक्तीकरण की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं. ऐसे में विभिन्न अभिसंरचनाओं (Infrastructure) के माध्यम से इस सशक्तीकरण में प्रगतिशील बदलाव देखने को मिलता है. दीदियों के प्रयास का असर होगा कि खेतों की नमी बरकरार रहेगी, जो खेती- किसानी के लिए लाभदायक होगा.

Posted By : Samir ranjan.

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