तीन हत्या से सिहर उठा झारखंड का ये गांव, जानें कैसे धारदार हथियार से घटना को दिया गया अंजाम

Updated at : 24 Mar 2020 8:50 AM (IST)
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तीन हत्या से सिहर उठा झारखंड का ये गांव, जानें कैसे धारदार हथियार से घटना को दिया गया अंजाम

Simdega, Jharkhand: तीहरे हत्याकांड से झारखंड का सिमडेगा जिला दहल उठा.

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रविकांत साहू

सिमडेगा: तीहरे हत्याकांड के बाद खीजुरडीह गांव सिहर उठा. यह गांव झारखंड के सिमडेगा जिले के पाकरटांड थाना क्षेत्र में पड़ता है. गांव  पूरी तरह से शोक में डूब गया है. खिजुरडीह गांव निवासी सुचिता बेक एवं ज्योति बेक इस घटना से पूरी तरह से अंजान थे. बताया जा रहा है कि अन्य दिनों की तरह ही वे लोग अपने दैनिक कार्यो में व्यस्त थे. गांव में 2 दिन पहले ज्योति बेक का पति खूंटी निवासी पिंगल होरो आया हुआ था. ज्योति बेक को अपने घर ले जाने की बातें कहने लगा. इसी बीच दोनों के बीच कहासुनी हो गयी.

मौके पर पिंगल होरो की सरहज सुचिता बेक भी मौजूद थी. विवाद होने के बाद किसी घटना से अनजान सुचिता बेक एवं ज्योति बेक डेढ़ माह के अपने पुत्र एल्बीन होरो को लेकर घर के पास में ही स्थित बागान चले गये. बागान में वे लोग अपने दैनिक कार्य में व्यस्त थे. इसी क्रम में पिंगल होरो क्रोधित होकर वहां पहुंचा एवं कुदाल से मार कर अपनी पत्नी ज्योति बेक की हत्या कर दी. पिंगल होरो को इतना से मन  नहीं भरा. उसने अपने डेढ़ माह के बच्चे एल्बिन होरो की भी निर्मम हत्या कर दी. इस घटना क्रम में बीच-बचाव करने आयी सुचिता बेक को भी पिंगल होरो ने नहीं बख्शा. कुदाल से कई बार सुचिता बेक के सिर हमला कर उसे  गंभीर रूप से घायल कर दिया.

इसी बीच ग्रामीण वहां पहुंच गये. ग्रामीणों द्वारा किसी प्रकार सुचिता बेक को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया. सदर अस्पताल में इलाज के दौरान सुचिता बेक की मौत हो गयी.

सुचिता बेक गर्भवती थी

बताया जा रहा है कि सुचिता बेक गर्भवती थी. घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया. हर ओर इसी घटना की चर्चा होती रही. घटना के बाद सुचिता बेक के परिवार में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. उसके माता-पिता सदर अस्पताल आये. उनका रो-रोकर बुरा हाल था. सुचिता बेक के माता-पिता के आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. घटना से ग्रामीणों में काफी गुस्सा था. समय पर पुलिस पहुंच कर हत्या के आरोपी पिंगल होरो को अपने कस्टडी में ले लिया. पुलिस के आने में अगर थोड़ी देर होती तो ग्रामीणों का गुस्सा पिंगल होरो पर टूट पड़ता है.

मासूम पर भी नहीं आयी दया

मासूम का शव देख कर लोग फफक फफक कर रोने लगे. मासूम का शव देखकर लोग कह रहे थे देखो लग रहा है एल्बिन सो रहा है. लोग पिंगल होरों को राक्षस क्रूर की संज्ञा देते हुए कह रहे थे कि उसे इस मासूम पर भी दया नहीं आयी. बगान व आस पास खुन के धब्बे बिखड़े पड़े थे. आसपास का महौल पुरी तरह से हृदय विदारक थी.

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Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

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