समाज और निजी शिक्षकों की भागीदारी से बदल रही ग्रामीण शिक्षा की तस्वीर

जलडेगा प्रखंड के ग्रामीण स्कूलों में निजी शिक्षक कम मानदेय में दे रहे उत्कृष्ट शिक्षा
सिमडेगा. संसाधनों की कमी और शिक्षकों के अभाव से जूझते ग्रामीण स्कूलों की तस्वीर अक्सर निराशाजनक होती है. लेकिन जलडेगा प्रखंड के चार स्कूलों ने इस धारणा को बदलते हुए एक नयी मिसाल पेश की है. यहां समुदाय ने न केवल समस्या को पहचाना, बल्कि खुद आगे बढ़ कर समाधान भी तैयार किया. इन स्कूलों में नियुक्त निजी शिक्षक बेहद कम पारिश्रमिक पर भी पूरी लगन और निष्ठा के साथ बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं. राजकीयकृत उत्क्रमित मवि, हुटुबदा में सुखमनी कुमारी 2500 रुपये पर कक्षा एक से आठ तक के 67 बच्चों को पढ़ा रही हैं. यहां केवल दो सरकारी शिक्षक हैं. जीइएल मवि, तितलिंग रुमूल बरला 2500 रुपये पर 80 बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. यहां भी केवल दो सरकारी शिक्षक हैं. राजकीय उत्क्रमित उवि, पैतानो में वर्गिस कंडुलना 1500 रुपये पर कक्षा एक से 10 तक के 157 बच्चों को पढ़ा रहे हैं. यहां पांच सरकारी शिक्षक कार्यरत हैं. राजकीयकृत उत्क्रमित मवि, खरवागढ़ा में जीरेन तोपनो 2000 रुपये पर 110 बच्चों को शिक्षा दे रही हैं. यहां भी केवल दो सरकारी शिक्षक हैं. निजी शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत, मार्गदर्शक और भविष्य निर्माता बन चुके हैं.
जनभागीदारी बनी सबसे बड़ी ताकत
इस पहल की सबसे खास बात है समाज की सक्रिय भागीदारी. कहीं अभिभावक हर महीने 20-20 रुपये का योगदान दे रहे हैं, तो कहीं सरकारी शिक्षक भी अपनी आय से सहयोग कर रहे हैं. यह सामूहिक प्रयास साबित करता है कि छोटे-छोटे योगदान मिल कर बड़ा बदलाव ला सकते हैं.
लीड्स संस्था का योगदान
संस्था के परियोजना समन्वयक आलोक कुमार के अनुसार उनका उद्देश्य केवल सहयोग देना, नहीं बल्कि समुदाय को आत्मनिर्भर बनाना है. नियमित प्रशिक्षण, संवाद और जागरूकता के जरिये विद्यालय प्रबंधन समितियों को सक्रिय किया गया, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने है.
प्रशासन ने भी इस पहल को सराहा
बीडीओ डॉ प्रवीण कुमार ने इसे शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय मॉडल बताया. वहीं प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मनमोहन कुमार गोस्वामी ने शिक्षकों के समर्पण और संस्था के कार्यों की सराहना की.
ग्रामीण शिक्षा में नयी दिशा
जलडेगा के इन स्कूलों ने साबित कर दिया है कि यदि समाज जागरूक और संगठित हो, तो शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत के लिए किसी एक पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है. यह पहल न केवल एक उदाहरण है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा में व्यापक बदलाव की दिशा भी दिखाती है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




