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हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान है:राजेश अग्रवाल

Updated at : 09 Nov 2025 7:09 PM (IST)
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हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान है:राजेश अग्रवाल

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में झारखंड प्रांत के विभिन्न जिलों में संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के हिन्दी विषयों के आचार्य-आचार्याओं के लिए प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन किया गया.

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फोटो फाइल:9 एसआइएम:10-कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि सिमडेगा. सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में झारखंड प्रांत के विभिन्न जिलों में संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के हिन्दी विषयों के आचार्य-आचार्याओं के लिए प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उदघाटन सरस्वती माता, भारत माता और ओउम के तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व पुष्पार्चन कर किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखंड के प्रांतीय सहसचिव राजेश अग्रवाल उपस्थित थे. साथ ही प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाष चंद्र दूबे , प्रांत प्रशिक्षण टोली सदस्य गुंजन राकेश , हित रक्षा प्रमुख राजेंद्र बड़ाईक, विभाग संगठन मंत्री खेदु नायक , संकुल प्रमुख संतोष दास , जिला निरीक्षक हीरालाल महतो, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हनुमान बोंदिया, उपाध्यक्ष विद्या बड़ाईक, हरिश्चंद्र भगत ,रामकृष्ण महतो, मुरारी प्रसाद आदि उपस्थित थे. इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं ने सुंदर और मनमोहक स्वागत गीत प्रस्तुत किया. मुख्य अतिथि राजेश अग्रवाल ने मातृभाषा हिन्दी को एक महान भाषा बताते हुए कहा कि अन्य सभी भाषाओं का आदर करते हुए हमें हिन्दी जरूर सीखना चाहिए. उन्होंने कहा कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और भावनात्मक एकता का प्रतीक है. शिक्षकों का दायित्व है कि वह विद्यार्थियों में भाषा के प्रति प्रेम और गर्व की भावना जगाएं. विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष हनुमान बोंदिया ने विद्यालय में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रांतीय समिति को धन्यवाद देते हुए उपस्थित आचार्य-आचार्याओं को कहा कि हिन्दी को हमेशा शुद्ध बोलने का प्रयास होना चाहिए. कहा कि ऐसे प्रशिक्षण वर्ग न केवल शिक्षकों के ज्ञान में वृद्धि करते हैं, बल्कि उनमें नवीन ऊर्जा और शिक्षण के प्रति समर्पण भी उत्पन्न करते हैं. कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने हिन्दी भाषा की महत्ता, शिक्षण की नवीन तकनी और विद्यार्थियों में भाषाई रुचि जागृत करने के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी. प्रशिक्षकों ने बताया कि भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का आधार भी है. उन्होंने शिक्षकों को शिक्षण के दौरान विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, शुद्ध उच्चारण, लेखन-कौशल और साहित्यिक संवेदना विकसित करने पर बल दिया. कार्यक्रम का संचालन जिला निरीक्षक हीरालाल महतो ने किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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