डाड़ी का पानी पीते हैं बोलबावासी

Updated at : 18 Dec 2014 11:13 AM (IST)
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डाड़ी का पानी पीते हैं बोलबावासी

विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं बोलबा प्रखंड के लोग बीमारी के इलाज के लिए नहीं है प्रखंड में समुचित व्यवस्था सिमडेगा : बोलबा प्रखंड की तसवीर नहीं बदली है. विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं प्रखंडवासी. प्रखंड क्षेत्र में सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि समस्याएं व्याप्त हैं. प्रखंड की 80 प्रतिशत आबादी खेती […]

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विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं बोलबा प्रखंड के लोग
बीमारी के इलाज के लिए नहीं है प्रखंड में समुचित व्यवस्था
सिमडेगा : बोलबा प्रखंड की तसवीर नहीं बदली है. विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं प्रखंडवासी. प्रखंड क्षेत्र में सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि समस्याएं व्याप्त हैं. प्रखंड की 80 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है. किंतु सिंचाई की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान ठीक से खेती नहीं कर पाते हैं. किसान सिर्फ बरसाती पानी पर ही निर्भर हैं.
परिणाम स्वरूप किसान सिर्फ धान की खेती ही कर पाते हैं. बैंक ऑफ इंडिया द्वारा ढाइ हजार किसानों के बीच लगभग छह करोड़ का किसान क्रेडिट कार्ड का वितरण किया गया है. किंतु सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण उक्त रुपये बेकार साबित हो रहे हैं. परिणाम स्वरूप किसान कर्ज में डूबे हुए हैं. बोलबा मुख्यालय में एक मात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है. जिसकी स्थिति दयनीय है. इलाज की समुचित व्यवस्था स्वास्थ्य केंद्र में नहीं है. प्रखंड के अन्य हिस्सों में आठ उप स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित है. किंतु उक्त केंद्र एएनएम व कंपाउंडर के सहारे चलता है. केंद्रों में एएनएम की भी घोर कमी है. छोटी मोटी बीमारियों में भी लोगों को अन्यत्र जाना पड़ता है. प्रखंड मुख्यालय में स्थित बाजार परिसर की भी स्थिति काफी दयनीय है. बाजार परिसर में पेयजल एवं वाहन पड़ाव की व्यवस्था नहीं है.
इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. प्रखंड के कई इलाकों में भी ग्रामीणों के लिए पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं है. परिणाम स्वरूप लोग कुएं व डाड़ी का दूषित पानी पीने को विवश हैं. प्रखंड क्षेत्र में सड़क स्थिति भी दयनीय है. बोलबा में शिक्षा की स्तर पर काफी निमA है. प्रखंड में विभिन्न कोटि के कुल 75 विद्यालय हैं.
किंतु सभी विद्यालय में शिक्षकों की घोर कमी है. साथ ही विद्यालयों में सुविधाओं का भी घोर अभाव है. ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव के बाद आस जगी थी कि क्षेत्र का विकास होगा. किंतु स्थिति में कोई सुधार नहीं आया. लोगों ने कहा कि राज्य अलग हुआ, सिमडेगा को जिला बनाया गया एवं कई सरकारें बदली किंतु बोलबा में कोई बदलाव नहीं आया.
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