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राज्यपाल से की शिष्टाचार भेंट, प्राकृत व्याकरण ग्रंथ भेंट किया

आचार्य डॉ पद्मराज स्वामी जी महाराज के सान्निध्य में राज्यपाल को 30 जनवरी के सर्वधर्म सम्मेलन के लिए दिया गया आमंत्रण

सिमडेगा. मकर संक्रांति पर आचार्य डॉ पद्मराज स्वामी जी महाराज के सान्निध्य में राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार जी से शिष्टाचार भेंट की गयी. मौके पर उन्हें प्राकृत व्याकरण की पुस्तक, पुष्पगुच्छ व आदर की चादर भेंट कर सम्मानित किया गया. साथ ही आगामी 30 जनवरी को आयोजित प्रस्तावित सर्वधर्म सम्मेलन में ससम्मान सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया. भेंट के दौरान राज्यपाल श्री गंगवार व आचार्य डॉ पद्मराज स्वामी जी महाराज के मध्य प्राकृत भाषा एवं साहित्य के संदर्भ में सारगर्भित चर्चा हुई. राज्यपाल महोदय ने प्राकृत भाषा की समृद्ध परंपरा की जानकारी प्राप्त कर कहा कि इस भाषा का व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए तथा शिक्षण संस्थानों में इसे प्रमुखता से पढ़ाया जाना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि प्राकृत भाषा के बहुमूल्य सूत्रों का जनमानस तक पहुंचना वर्तमान पीढ़ी के लिए आवश्यक है. आचार्य डॉ पद्मराज स्वामी जी महाराज ने प्राकृत भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृत एक विशाल भाषा-परिवार का सामूहिक नाम है. इस भाषा में भगवान बुद्ध, तीर्थंकर महावीर समेत अनेक महापुरुषों ने जनकल्याणकारी उपदेश दिये. उन्होंने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी रामचरितमानस में अनेक स्थानों पर प्राकृत शब्दों का प्रयोग किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह भाषा जनसामान्य से गहराई से जुड़ी रही है. आचार्य जी ने कहा कि प्राकृत भाषा में धर्म, अध्यात्म के साथ-साथ काव्य, संगीत, स्थापत्य, ज्योतिष, वास्तु, गणित एवं चिकित्सा जैसे विषयों का विपुल और कालजयी साहित्य संकलित है. इस साहित्य के बोध के लिए सरल व सुबोध व्याकरण की आवश्यकता सदैव रही है, जिसमें प्रस्तुत प्राकृत व्याकरण ग्रंथ पूर्णतः सहायक है. उन्होंने बताया कि आचार्य भरत, आचार्य चंड, आचार्य वररुचि और आचार्य हेमचंद्र जैसे विद्वानों ने प्राकृत व्याकरण की रचना की, जिनमें आचार्य हेमचंद्र का व्याकरण सर्वाधिक प्रसिद्ध है और प्रस्तुत ग्रंथ उसी पर आधारित है. उन्होंने बताया कि प्राकृत के अंतर्गत अर्धमागधी, शौरसेनी, महाराष्ट्री, पैशाची, मागधी, पाली, शिलालेखी आदि भाषाएं शामिल हैं. यह मूलतः आमलोगों की भाषा थी, जो कालांतर में समृद्ध साहित्य की भाषा बन गयी. इस अवसर पर जैन सभा अध्यक्ष प्रवीन जैन, कोषाध्यक्ष गुलाब जैन सहित प्रमोद जैन, सुधीर जैन, अनिल मांजरिया एवं राहुल कुमार ने राज्यपाल महोदय का अभिनंदन किया.

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