सिमडेगा : जंगली हाथियों ने बर्बाद किया पूरा घर, अब खाने के लाले, कोई नहीं ले रहा सुध

Updated at : 04 Jan 2019 7:48 PM (IST)
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सिमडेगा : जंगली हाथियों ने बर्बाद किया पूरा घर, अब खाने के लाले, कोई नहीं ले रहा सुध

वन विभाग से अब तक नहीं मिली सहायता, प्रशासन ने भी सुध नहीं ली रविकांत साहू, सिमडेगा नव वर्ष पर जहां एक ओर जिले के लोग जश्न में डूबे हुए हैं. वहीं दूसरी ओर ठेठइटांगर प्रखंड के नीमटोली व ढोड़ीबहार के ग्रामीण खुशियों से दूर दहशत के साये में रात गुजार रहे हैं. उक्त दोनो […]

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वन विभाग से अब तक नहीं मिली सहायता, प्रशासन ने भी सुध नहीं ली

रविकांत साहू, सिमडेगा

नव वर्ष पर जहां एक ओर जिले के लोग जश्न में डूबे हुए हैं. वहीं दूसरी ओर ठेठइटांगर प्रखंड के नीमटोली व ढोड़ीबहार के ग्रामीण खुशियों से दूर दहशत के साये में रात गुजार रहे हैं. उक्त दोनो गांव में जंगली हाथियों ने जमकर तांडव मचाया है. जंगली हाथियों ने पिछले दिनों छह घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया था तथा घरों में रखे अनाज को खा गये थे. साथ ही घर के सामानों को भी बरबाद कर दिया था.

हाथियों के उत्पात से गांव का छह परिवार पूरी तरह बेघर हो गया है. हाथियों ने जिनके घरों को क्षतिग्रस्त किया है इसमें ज्योति केरकेट्टा, जॉन मसीह केरकेट्टा, लक्ष्मी देवी, प्रफुल बाड़ा, मार्टिन बाड़ा सहित छह लोग शामिल हैं.

हाथियों ने ज्योति केरकेट्टा का घर ध्वस्त करने के अलावा पांच क्विंटल धान, 25 किलो चावल, 40 किलो उरद, जोन मसीह के पांच क्विंटल धान, 50 किलो उरद, लक्ष्मी देवी को आठ क्विंटल धान,70 किलो उरद, प्रफुल बाड़ा के 30 क्विंटल धान, छह मन उरद, मार्टिन बाड़ा के 12 मन धान चट कर गये.

उक्त परिवारों की स्थिति काफी दयनीय हो गयी है. उनके समक्ष खाने के लाले पड़ गये हैं. उक्त परिवार इस ठिठुरन भरी रात में दूसरों के छत पर खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश हैं. इसके अलावा अन्य ग्रामीण भी हाथियों के इस आतंक से काफी भयभीत हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि हमारी जिंदगी नारकीय बन गयी है. हमारी समस्याओं का समाधान करने वाला कोई नहीं. वन विभाग की ओर से अब तक कोई सहायता नहीं मिली है. वन विभाग के पदाधिकारी सिर्फ प्रभावितों का नाम लिख कर चले गये.अभी तक कोई सहायता राशि प्रदान नहीं की गयी है.

पलायन ही एक सहारा है : प्रभावित ग्रामीण

हाथियों के उत्पात से प्रभावित ज्योति केरकेट्टा कहती हैं कि हमारा सब बरबाद हो गया. हमारे पास खाने के लाले पड़ गये हैं. अब पलायन ही सहारा है. उन्होंने कहा कि सभी सामान घर में ही दब गये हैं. बच्चों का पेट कैसे भरें, यह चिंता सता रही है.

लक्ष्मी देवी रोते हुए कहती हैं हमारा सब कुछ समाप्त हो गया. चार बेटियां हैं इसमें एक की शादी करनी थी. सब कुछ बरबाद हो गया. उसके पति का भी देहांत हो गया है. बेटी की शादी कैसे होगी इसी की चिंता है. ना घर है ना ठिकाना. बेटी की शादी करना भी मुश्किल नजर आ रहा है.

मसीह केरकेट्टा ने कहा कि भय के माहौल में दिन गुजार रहे हैं. जंगली हाथियों का झुंड आसपास के ही जंगल में मौजूद है. वन विभाग द्वारा हाथियों को भगाने के लिए अब तक कोई पहल नहीं की गयी है. यही स्थिति रही तो गांव छोड़ कर ही भागना पड़ेगा.

प्रभावितों से मिले कांग्रेसी

कांग्रेस पार्टी के जिला उपाध्यक्ष जोनसन मिंज, जिला प्रवक्ता रंधीर रंजन, तेरेसा एक्का व देवनिश एक्का ने प्रभावितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी. ग्रामीणों ने समस्याओं से उन्हें अवगत कराया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रभावितों की सूची तैयार की वन विभाग को सौंपने की बात कही है तथा मुआवजे की मांग की. जिला उपाध्यक्ष श्री मिंज ने कहा कि यदि शीघ्र ही वन विभाग द्वारा सहायता नहीं दी जाती तो कांग्रेस पार्टी आंदोलन करने को बाध्य हो जायेगा.

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