सिमडेगा में बोलीं विधायक विमला प्रधान- जिले को कुपोषण मुक्त बनाना है
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Sep 2018 8:47 PM
रविकांत@सिमडेगा नगर भवन में जिला स्तरीय पोषण कार्यशाला का आयोजन किया गया. यहां पर मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं सहित अन्य महिलाएं व सेविका व सहायिका के साथ ही अन्य लोग भी उपस्थित थे. कार्यक्रम का उदघाटन विधायक विमला प्रधान व उपायुक्त जटाशंकर चौधरी व डीडीसी अन्नय मित्तल ने किया. इस अवसर पर विधायक विमला […]
रविकांत@सिमडेगा
नगर भवन में जिला स्तरीय पोषण कार्यशाला का आयोजन किया गया. यहां पर मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं सहित अन्य महिलाएं व सेविका व सहायिका के साथ ही अन्य लोग भी उपस्थित थे. कार्यक्रम का उदघाटन विधायक विमला प्रधान व उपायुक्त जटाशंकर चौधरी व डीडीसी अन्नय मित्तल ने किया. इस अवसर पर विधायक विमला प्रधान ने कहा कि पोषण के साथ-साथ बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों को आगे बढ़ायें.
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र तथा बच्चों के साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें. आंगनबाड़ी सेविक, सहायिका अपने पोषक क्षेत्र में कुपोषण खत्म करने की दिशा में अच्छा कार्य करें. उन्होंने कहा कि गर्भवती माताओं, बच्चों का खान-पान रहन सहन, साफ-सफाई, पोषण पर जन आंदोलन की तरह कार्य करें. जिले को कुपोषण मुक्त जिला बनाना है. इस दिशा में सभी आगनबाड़ी सेविका, सहिया विशेष दूत के रूप कार्य करें.
उन्होंने यह भी कहा कि जिले में सभी आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन समय से खुलना चाहिए. क्षेत्र भ्रमण के दौरान कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे बाहर खेलते हुए दिखते हैं. परंतु सेविका सहायिका नहीं रहती है. ऐसा कदापी नहीं होना चाहिए. सहायिका, प्रशिक्षिका पोषण माह के सप्ताहिक कार्यक्रम को स्थानीय महिलाओं तक हिंदी एवं नागपुरी भाषा में लिख कर उपलब्ध करायें एवं उन्हें जागरूक करें.
मौके पर उपायुक्त जटाशंकर चौधरी ने कहा कि 1 से 30 सितंबर तक जिले में राष्ट्रीय पोषण माह चलाया जा रहा है. लोगों में खून की कमी, बौनापन, पोषण की कमी, जन्म के समय बच्चों का कम वजन होना जैसे कुपोषण से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए पोषण अभियान चलाया जा रहा है. सेविकाओं को इस पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है. पोषण माह में जो कार्य है उसे तो करना है इसके अलावे पोषण के क्षेत्र में अपने स्तर से भी कार्य करने का प्रयास करें.
उन्होंने कहा कि कुपोषण को खत्म किया जा सके. इसके लिए दाल, हरी सब्जी, फल, दूध का सेवन करने से मां व बच्चा स्वस्थ्य रहेगा. जिस क्षेत्र में पोषक क्षेत्र में महिला, बच्चा कुपोषित नहीं मिलेगा उसे पुरस्कार दिया जायेगा. गर्भवती महिलाओं की गोद भरायी करायी गयी. बच्चों को मूंहजुठी करायी गयी.
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