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Seraikela Kharsawan News : विरासत बचाने में वरदान बन रहे टुसू मेला

Updated at : 19 Jan 2026 11:52 PM (IST)
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Seraikela Kharsawan News : विरासत बचाने में वरदान बन रहे टुसू मेला

कुचाई. पुष्प चंद्र शांति टुसू मेला में आस्था, परंपरा व सांस्कृतिक विरासत का अनोखा संगम

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खरसावां.

सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड स्थित बारुहातु गांव में सोमवार को पुष्प चंद्र शांति टुसू मेला का आयोजन हुआ. मेला का उद्घाटन विधायक दशरथ गागराई ने किया. यहां कुचाई, पड़ोसी जिला खूंटी व रांची से महिलाएं पारंपरिक चौड़ल लेकर मेला में पहुंचीं. मेला में आस्था, परंपरा व सांस्कृतिक विरासत का अनोखा संगम दिखा. चौड़ल के समक्ष महिलाओं ने लोक गीत पर नृत्य किया. हजारों लोग टुसू के रंग में सराबोर रहे. पियाकुली (तमाड़, रांची) से आया 41 फीट के चौड़ल को मिला पहला पुरस्कार :मेला में पियाकुली (तमाड़) से लाया गया 41 फीट का चौड़ल आकर्षण का केंद्र रहा. इसे प्रथम पुरस्कार दिया गया. चौड़ल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था. महिला सदस्यों ने चौड़ल के सामने सांस्कृतिक कार्यक्रम किया. जय मां सरना चौड़ल समिति पियाकुली की महिलाओं ने बताया कि करीब एक माह में चौड़ल को तैयार किया है. इसे आस-पास के मेला में भी प्रदर्शित करेंगे.

हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है टुसू मेला : दशरथ गागराई

विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि पुष्प चंद्र शांति टुसू मेला यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है. साल दर साल इसकी भव्यता बढ़ रही है. इस मेला की ख्याति पड़ोसी जिला खूंटी व रांची तक फैली है. मेला से सामाजिक समरसता की भावना मजबूत हो रही है. श्री गागराई ने कहा कि मेला से कला, समृद्ध संस्कृति, परंपरा के साथ गांव की खेल प्रतिभाओं को मंच मिल रहा है. उन्होंने सांस्कृतिक धरोहर व परंपरा को संरक्षित करने पर बल दिया. मौके पर विधायक प्रतिनिधि धर्मेंद्र मुंडा, भरत सिंह मुंडा, करम सिंह मुंडा, मंगल सिंह मुंडा, रेखा उरांव, राहुल सोय, वृंदावन सिंह मुंडा, कृष्णा मुंडा, विजय सिंह मुंडा, उपेंद्र सिंह मुंडा, रामचंद्र सिंह मुंडा, सुखराम मृधा, भुवनेश्वर सिंह मुंडा, घासिया दास, गुरवा स्वांसी, मुन्ना सोय, दशरथ उरांव आदि उपस्थित रहे.

लोक पर्व से जुड़ रही नयी पीढ़ी व महिलाएं

बारुहातु महिला टुसू समिति की प्रमुख दुर्गामणि मुंडा के अनुसार, चौड़ल/टुसू स्थानीय परंपरा व संस्कृति से जुड़ा है. हाल में लोक नृत्यों के प्रति नयी पीढ़ी का झुकाव बढ़ रहा है. महिलाएं लोक पर्वों से जुड़ रही हैं. परंपरा व संस्कृति को संरक्षण मिल रहा है.

10 हजार से अधिक लोग जुटे लाखों का कारोबार हुआ

मेला के दौरान करीब 10 हजार से अधिक लोग जुटे थे. गांव के दोनों मैदान में खड़ा होने तक की जगह नहीं थी. गांव के कृष्णा सिंह मुंडा ने बताया कि मेला में करीब 100 छोटी-बड़ी दुकानें लगी थीं. यहां लाखों का कारोबार हुआ. ज्ञात हो कि मकर संक्रांति से एक पखवाड़े तक विभिन्न गांवों में टुसू मेला का आयोजन होता है. यह पर्व सामाजिक समरसता के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है.

साल दर साल बढ़ रही 90 साल पुराने मेले की भव्यता

पुष्प चंद्र शांति टुसू मेला की भव्यता साल दर साल बढ़ रही है. मेला समिति के अध्यक्ष वृंदावन सिंह मुंडा ने बताया कि 90 साल पहले छोटे स्तर पर मेला को शुरू किया था. पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष डेढ़ गुना अधिक भीड़ रही. ग्रामीण क्षेत्रों में मेला ही लोगों के मनोरंजन का साधन है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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