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Sarailkela Chhau Dance: भोपाल में छऊ नृत्य ने मचाया धमाल, डांसरों की शानदार प्रस्तुति

Updated at : 19 Jan 2026 4:00 PM (IST)
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Sarailkela Chhau Dance

भोपाल के भारत भवन में छऊ नृत्य पेश करते सरायकेला के कलाकार.

Sarailkela Chhau Dance: भोपाल के प्रसिद्ध भारत भवन में सरायकेला छऊ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. “महाभारत, कालजयी सभ्यता की महागाथा” कार्यक्रम के तहत ‘उरुभंगम’ नृत्य नाटिका के माध्यम से धर्म और अधर्म के युद्ध, द्रौपदी चीरहरण, भीम-दुर्योधन युद्ध और कर्ण-द्रोणाचार्य के अंत जैसे प्रसंगों को पेश किया गया. झारखंड के कलाकारों ने शानदार नृत्य, संगीत और अभिनय से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अद्भुत झलक दिखाई. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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Sarailkela Chhau Dance: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रसिद्ध भारत भवन में सरायकेला छऊ नृत्य की शानदार प्रस्तुति देखने को मिली. “महाभारत, कालजयी सभ्यता की महागाथा” कार्यक्रम के तहत छऊ नृत्य नाटिका ‘उरुभंगम’ का मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस कार्यक्रम के माध्यम से महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत की कथा को नृत्य और संगीत के जरिए पेश किया गया.

महाभारत के प्रमुख प्रसंगों का सजीव मंचन

उरुभंगम प्रस्तुति में महाभारत के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को दिखाया गया. इन प्रसंगों में द्रौपदी चीरहरण का सीन, धर्म और अधर्म के युद्ध का संघर्ष, द्रोणाचार्य और कर्ण का दुखद अंत, और अंत में दुर्योधन के अहंकार पर भीम की गदा का प्रहार शामिल था. इन सभी सीन को बेहद प्रभावशाली तरीके से मंच पर उतारा गया. नृत्य, भाव-भंगिमा और मुखौटों के माध्यम से कलाकारों ने कहानी को इस तरह पेश किया कि दर्शक भावनात्मक रूप से उससे जुड़ते चले गए.

प्रसिद्ध गुरुओं के निर्देशन में हुआ आयोजन

इस पूरे कार्यक्रम का निर्देशन छऊ नृत्य कला केंद्र सरायकेला-खरसावां और रजतेंदु छऊ कला निकेतन से जुड़े एसएनए अवॉर्डी गुरु तपन कुमार पटनायक और सीनियर फेलो रजतेंदु रथ ने किया. उनके निर्देशन में महाभारत के विभिन्न अध्यायों को एक एक जगह इकट्ठा करके बेहद सुंदर तरीके से पेश किया गया. मंच पर हर सीन अनुशासन, सुंदरता और इमोशनल नजर आया.

कलाकारों ने निभाई दमदार भूमिकाएं

कार्यक्रम में सूत्रधार की भूमिका में गुरु तपन कुमार पटनायक, श्रीकृष्ण के रूप में संजय कर्मकार, यज्ञसिनी की भूमिका में कुसुमी पटनायक और द्रौपदी की भूमिका में परी ने प्रभावशाली एक्टिंग की. भीष्म की भूमिका रजतेंदु रथ ने निभाई. वहीं, भीम के रूप में सीनियर फेलो निवारण महतो दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने. दुर्योधन के किरदार में काली प्रसन्न षाडंगी, द्रोणाचार्य के रूप में गणेश परिछा, अर्जुन के रूप में सनथ कुमार साहू और कर्ण की भूमिका में होली कुम्हार ने शानदार प्रस्तुति दी. सैनिकों की भूमिका निभाने वाले कलाकारों ने भी मंच को जीवंत बना दिया.

संगीत और म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट ने बढ़ाया प्रभाव

इस प्रस्तुति में संगीत का भी अहम योगदान रहा. बांसुरी पर सीनियर फेलो देवराज दुबे की मधुर धुनों ने माहौल को भावुक और गंभीर बनाया. वहीं, ढोल पर बाबूराम सरदार और सीनियर फेलो पूर्ण सरदार की थाप ने युद्ध और संघर्ष के सीन को और भी प्रभावशाली बना दिया. संगीत और नृत्य के तालमेल ने दर्शकों को पूरे एक घंटे तक बांधे रखा.

अंतरराष्ट्रीय रंगकर्मी भी ले रहे हिस्सा

यह आयोजन 16 से 24 जनवरी तक चल रहा है, जिसका उद्घाटन 16 जनवरी को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया था. इस महोत्सव में जापान, इंडोनेशिया, श्रीलंका सहित देश-विदेश के कई प्रसिद्ध रंगकर्मी भाग ले रहे हैं, जिससे यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय पहचान भी प्राप्त कर रहा है.

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महाभारत हमारी सभ्यता का दर्पण

नृत्य निदेशक गुरु तपन कुमार पटनायक ने कहा कि महाभारत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह भारत की सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत चित्रण है. सरायकेला छऊ के माध्यम से इस महान महाकाव्य को मंच पर उतारना हमारे लिए गर्व की बात है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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