झारखंड का गौरव बना सरायकेला, इस मामले में बना नंबर- 1, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित

Published by : Sameer Oraon Updated At : 17 Oct 2025 9:24 PM

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मान प्राप्त करते डीसी नितिश कुमार सिंह, Pic Credit- Prabhat Khabar

Saraikela Award: सरायकेला-खरसावां जिले ने झारखंड का नाम रोशन किया है. “धरती आबा जनभागीदारी अभियान” में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपायुक्त नितिश कुमार सिंह को विज्ञान भवन, नयी दिल्ली में सम्मानित किया. यह सम्मान जनजातीय सशक्तिकरण और नवाचारी प्रशासनिक पहल की बड़ी पहचान है.

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Saraikela Award, शचिंद्र कुमार दाश, (सरायकेला): सरायकेला-खरसावां जिले ने एक बार फिर राज्य का नाम रोशन किया है. भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे “धरती आबा जनभागीदारी अभियान” में जिले ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. इस उपलब्धि के लिए शनिवार को नयी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपायुक्त नितिश कुमार सिंह को सम्मानित किया. कार्यक्रम के दौरान जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव भी मौजूद रहे. यह सम्मान सरायकेला-खरसावां जिले में जनजातीय सशक्तिकरण, सामुदायिक भागीदारी और नवाचारी प्रशासनिक पहल का परिणाम माना जा रहा है.

जनजातीय विकास का मॉडल बना सरायकेला

सरायकेला जिले में “धरती आबा जनभागीदारी अभियान” के तहत कई नवाचारी कदम उठाये गये. प्रशासन ने विकास योजनाओं के शत-प्रतिशत सैचुरेशन का लक्ष्य तय किया और उसे पूरा करने में जुट गया. जनजातीय इलाकों में सड़क, आवास, शिक्षा, पोषण, पेयजल और आजीविका के क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति हुई है. अब तक 199 डिजिटल लर्निंग सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं. वनाधिकार कानून के तहत 67 ग्राम पंचायतों के 311 गांवों में विभागीय कार्य पूरे किए गए हैं.

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शिक्षा, कौशल और स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव

शिक्षा के क्षेत्र में सरायकेला में 1421 विद्यालय (818 प्राथमिक, 502 मध्य और 101 उच्च विद्यालय) संचालित हैं. साथ ही 1373 आंगनबाड़ी केंद्र और 28 छात्रावास जनजातीय बच्चों के लिए कार्यरत हैं. कौशल विकास योजनाओं में जिले ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के तहत 5793 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया, जबकि राज्य कौशल मिशन के तहत 705 बैच में प्रशिक्षण दिया गया. स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में 14 पीएचसी और 8 सीएचसी के माध्यम से लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है.

सीमित संसाधनों में बड़ा काम

सीमित संसाधनों के बावजूद सरायकेला-खरसावां ने यह साबित कर दिया है कि समर्पण, नये कदम और जनभागीदारी से भी विकास का मजबूत मॉडल खड़ा किया जा सकता है. इस उपलब्धि से न केवल जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त हुई है, बल्कि यह हर नागरिक के लिए गर्व का विषय बन गया है.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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