राजनगर. राजनगर प्रखंड में मंगलवार की शाम हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. बारिश से धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. क्षेत्र के कई गांवों में धान की खड़ी फसल हवा और वर्षा की मार से झुक गयी है. जहां अबतक धान की बाली पूरी तरह नहीं निकली थी, वे खेत पानी में डूब गये हैं. इससे उपज की संभावना बेहद कम हो गयी है. किसानों का कहना है कि इस समय धान की फसल पकने की अवस्था में थी, ऐसे में बारिश और तेज हवा ने फसल को झुका दिया. किसानों ने बताया कि बारिश से उनकी महीनों की मेहनत पर संकट मंडरा गया है. खेतों में पानी भर जाने से कटाई का कार्य में विलंब होगा. इससे धान सड़ने का खतरा है. वहीं, कुछ किसानों के लिए बरसात राहत लेकर आयी. इस बारिश से टमाटर, बैंगन, साग और हरी सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के चेहरे पर खुशी देखी जा रही है. उनका कहना है कि हाल की बरसात से मिट्टी में नमी बढ़ी है, जिससे सब्जी फसलों को काफी लाभ हुआ है. सब्जी उत्पादकों के लिए बारिश वरदान बनी है.‘मोंथा’ का असर, आकाश में छाये रहे बादल व हल्की बूंदाबांदी
सरायकेला. बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ का सरायकेला समेत आस-पास के क्षेत्रों में बुधवार को भी असर देखा गया. बुधवार को आकाश में बादल छाये रहे, वहीं हल्की हवा चलने के साथ बूंदाबांदी हुई. हवा चलने से खेतों में धान की फसल गिर गयी. मालूम हो कि धान की फसल लगभग तैयार है. धान के पौधे गिरने से नुकसान होने की आशंका है. किसानों का कहना है कि अगर बारिश अधिक हुई, तो धान की फसल बर्बाद हो जायेगी. वहीं, रबी की खेती पर भी इसका व्यापक असर पड़ेगा. नमी अधिक होने से किसान रबी की फसल के लिए खेत को तैयार नही कर पा रहे हैं. वहीं जो सब्जी की खेती हुई है उसमें भी नुकसान की संभावना है.तूफान को लेकर जिला प्रशासन सतर्क :
चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम को संभावित क्षेत्रों में तैनात करने का निर्देश दिया है. चक्रवाती तूफान को लेकर आम लोग भी सतर्क हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

