खरसावां में 108 कलश जल से हुआ महाप्रभु का महास्नान, जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंजा हरिभंजा

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हरिभंजा के जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ को स्नान कराते श्रद्धालु. फोटो: प्रभात खबर

Seraikela-Kharsawan News: सरायकेला-खरसावां के हरिभंजा स्थित जगन्नाथ मंदिर में देवस्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन का 108 कलश जल से महास्नान कराया गया. अब 15 दिनों तक अनासर काल रहेगा. 14 जुलाई को नवयौवन दर्शन और 16 जुलाई को रथयात्रा निकलेगी.

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सरायकेला से शचींद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Seraikela-Kharsawan News: सरायकेला-खरसावां जिले के हरिभंजा स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को देवस्नान पूर्णिमा श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ मनाई गई. इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और सुदर्शन का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 108 कलश पवित्र जल से महास्नान कराया गया. स्नान मंडप में पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए. महास्नान के दौरान मंदिर परिसर “जय जगन्नाथ” के जयघोष, शंखध्वनि और उलुध्वनि से गूंज उठा.

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परंपरा के अनुसार हुआ चतुर्धा विग्रह का महास्नान

देवस्नान पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर के सेवायतों ने चतुर्धा विग्रह को रत्न सिंहासन से स्नान मंडप तक विधिवत लाकर विशेष पूजा-अर्चना की. परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ को 35 कलश, भगवान बलभद्र को 42 कलश, देवी सुभद्रा को 20 कलश तथा सुदर्शन को 11 कलश पवित्र जल से स्नान कराया गया. महास्नान के दौरान भगवान को अगुरु, चंदन, गाय का घी, दूध, दही, मधु और हल्दी का लेप भी अर्पित किया गया. वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधानों के बीच संपन्न इस दुर्लभ अनुष्ठान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे.

मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

महास्नान कार्यक्रम के दौरान पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा. श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन और महास्नान के साक्षी बनने के लिए सुबह से ही मंदिर पहुंचने लगे थे. पूरे आयोजन में अनुशासन और धार्मिक परंपराओं का विशेष ध्यान रखा गया. इस अवसर पर पुरोहित प्रदीप कुमार दाश, भरत त्रिपाठी, जगन्नाथ त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और मंदिर से जुड़े सेवायत उपस्थित रहे.

अब शुरू होगा अनासर काल

धार्मिक मान्यता के अनुसार देवस्नान पूर्णिमा पर महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अस्वस्थ हो जाते हैं. इसके बाद उन्हें उपचार के लिए अणवसर (अनासर) गृह में विराजमान कराया जाता है. इस दौरान देशी जड़ी-बूटियों और पारंपरिक औषधियों से उनकी सेवा की जाती है. अनासर काल के दौरान भगवान सार्वजनिक दर्शन नहीं देते. इस अवधि में मंदिर की नियमित पूजा परंपरा के अनुसार जारी रहती है, लेकिन श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष दर्शन का अवसर नहीं मिलता.

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14 जुलाई को नवयौवन दर्शन, 16 जुलाई को रथयात्रा

मंदिर परंपरा के अनुसार 15 दिनों के अनासर काल के बाद 14 जुलाई को नेत्रोत्सव के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा नवयौवन स्वरूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे. इसे नवयौवन दर्शन कहा जाता है, जिसका भक्तों को पूरे वर्ष इंतजार रहता है. इसके बाद 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथ पर विराजमान होकर मौसीबाड़ी (गुंडिचा मंदिर) के लिए प्रस्थान करेंगे. रथयात्रा महोत्सव को लेकर मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच अभी से उत्साह का माहौल है. हरिभंजा का यह आयोजन क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक उत्सवों में शामिल माना जाता है, जिसमें हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं.

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