ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पारंपरिक तरीके से हुई भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा

ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को दिव्य स्नान कराते श्रद्धालु.
भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सोमवार को पारंपरिक तरीके से भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा का विधान किया गया. सखीचंद घाट नया बाजार स्थित जगन्नाथ
भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट
Jagannath Snan Yatra: ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक स्नान यात्रा श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई. शहर के सखीचंद घाट नया बाजार, गिरधारी साह हाट और बाटा गली स्थित जगन्नाथ मंदिरों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विधि-विधान से स्नान कराया गया. इस दौरान श्रद्धालुओं ने मूल प्रतिमा का दर्शन कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया.
108 घड़ों के पवित्र जल से हुआ भगवान का अभिषेक
सखीचंद घाट नया बाजार स्थित जगन्नाथ मंदिर में पंडित समीर कुमार मिश्र, पुजारी सौरभ कुमार मिश्र, आनंद मिश्रा तथा 11 ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्नान यात्रा का अनुष्ठान संपन्न कराया.बूढ़ानाथ गंगा तट, सरयू नदी, हरिद्वार के गंगाजल और पुरी के समुद्र जल में हल्दी, इत्र और औषधियां मिलाकर भगवान जगन्नाथ का अभिषेक किया गया. परंपरा के अनुसार 108 घड़ों से भगवान को स्नान कराया गया.
जन्मोत्सव के साथ 33 करोड़ देवी-देवताओं को दिया गया निमंत्रण
मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा भगवान जगन्नाथ का जन्मदिन भी माना जाता है. इस दिन भगवान अपने भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और स्कंद पुराण में वर्णित 33 करोड़ देवी-देवताओं के साथ स्नान करते हैं. इसी परंपरा के तहत विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए.
Jagannath Snan Yatra: अब 17 दिनों तक एकांतवास में रहेंगे भगवान जगन्नाथ
स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ को 17 दिनों के लिए विशेष कक्ष में एकांतवास में रखा जाएगा. मान्यता है कि स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और इस दौरान उन्हें औषधीय काढ़ा और जड़ी-बूटियों का भोग लगाया जाता है. मंदिर परंपरा में इस अवधि को “अनासार” कहा जाता है. इस दौरान भगवान के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे.
16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा
नया बाजार सखीचंद घाट जगन्नाथ मंदिर के पंडित समीर मिश्रा ने बताया कि 16 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि के अवसर पर भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और रथ यात्रा से पहले स्नान यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है.
मौसी घर की यात्रा पर निकलते हैं भगवान जगन्नाथ
बाटा गली स्थित जगन्नाथ मंदिर के पंडित मुकेश मिश्रा के अनुसार रथ यात्रा से एक दिन पहले भगवान स्वस्थ हो जाते हैं और निशा पूजा के बाद गर्भगृह में विराजमान किए जाते हैं. इसके बाद भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी रोहिणी के घर जाते हैं, जहां उन्हें विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है. भगवान दशमी तिथि तक वहीं निवास करते हैं और फिर वापस अपने मंदिर लौटते हैं.
भक्तों के दुख-दर्द हरने निकलते हैं भगवान
मान्यता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के रोग, शोक और कष्ट दूर करने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं और सभी को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं.
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