108 घड़ों से होगा भगवान जगन्नाथ का अभिषेक, भागलपुर में आज से शुरू होगा रथयात्रा अनुष्ठान

भगवान जगन्नाथ
Jagannath Snan Yatra Bhagalpur : : क्या आप जानते हैं कि भगवान जगन्नाथ साल में एक बार ऐसा दिव्य स्नान करते हैं, जिसमें 33 करोड़ देवी-देवताओं की उपस्थिति मानी जाती है? इस स्नान के बाद भगवान 17 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते. भागलपुर के जगन्नाथ मंदिरों में आज इसी अनूठी परंपरा की शुरुआत होने जा रही है.
भागलपुर से रिपोर्ट
Jagannath Snan Yatra Bhagalpur : ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर रविवार 29 जून से भागलपुर में भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा के साथ रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ होगा. शहर के सखीचंद घाट नया बाजार स्थित जगन्नाथ मंदिर, गिरधारी साह हाट स्थित मंदिर और बाटा गली के समीप स्थित जगन्नाथ मंदिरों में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का विधि-विधान से महा स्नान कराया जाएगा.
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान जगन्नाथ 33 करोड़ देवी-देवताओं के साथ स्नान करते हैं. स्नान यात्रा के बाद भगवान 17 दिनों तक ‘अना सार’ यानी आइसोलेशन में रहेंगे और भक्त उनके दर्शन नहीं कर सकेंगे.
भगवान जगन्नाथ के जन्मोत्सव से जुड़ी है स्नान यात्रा
ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ का जन्मोत्सव भी माना जाता है. स्कंद पुराण के अनुसार इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ 33 करोड़ देवी-देवताओं की उपस्थिति में दिव्य स्नान करते हैं. यही वजह है कि जगन्नाथ परंपरा में स्नान यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है.
भागलपुर के विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों में भी इस परंपरा का निर्वहन वर्षों से किया जा रहा है. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
108 घड़ों से होगा भगवान का महा स्नान
सखीचंद घाट नया बाजार स्थित जगन्नाथ मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का महा स्नान कराया जाएगा. परंपरा के अनुसार 108 घड़ों में भरे पवित्र जल से भगवान का अभिषेक किया जाएगा.
इस जल में बूढ़ानाथ गंगा तट, सरयू नदी, हरिद्वार के गंगाजल और पुरी के समुद्री जल को मिलाया जाएगा. इसके साथ ही हल्दी, इत्र और औषधियां भी जल में मिलायी जाएंगी. मान्यता है कि इस विशेष स्नान से भगवान लोककल्याण का संदेश देते हैं.
स्नान के बाद 17 दिनों तक नहीं होंगे दर्शन
स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ को 17 दिनों तक गर्भगृह से अलग विशेष कक्ष में रखा जाता है. मंदिर परंपरा में इसे ‘अना सार’ कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार महा स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं, इसलिए उन्हें विश्राम दिया जाता है.
इस अवधि में मंदिरों में भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन बंद रहते हैं. भगवान को जड़ी-बूटी से बने काढ़े और औषधीय भोग अर्पित किये जाते हैं. 17 दिनों के बाद भगवान पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं.
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Jagannath Snan Yatra Bhagalpur: 16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा
स्नान यात्रा के बाद अब श्रद्धालुओं की निगाहें रथयात्रा पर टिकी हैं. आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया, 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी. इसके लिए मंदिरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.
मंदिर परिसर के रंग-रोगन और सौंदर्यीकरण का कार्य भी प्रारंभ हो गया है. मंदिर प्रबंधन को उम्मीद है कि इस बार रथयात्रा और स्नान यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे.
भागलपुर के मंदिरों में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
सखीचंद घाट नया बाजार स्थित मंदिर में पंडित समीर कुमार मिश्र, पुजारी सौरभ कुमार मिश्र, आनंद मिश्रा सहित 11 ब्राह्मण वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना संपन्न कराएंगे. शहर के अन्य जगन्नाथ मंदिरों में भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे.
श्रद्धालुओं के लिए यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी है.
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By Pratyush Prashant
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