Seraikela Kharsawan News : आदिवासी अस्मिता व स्वाभिमान के प्रतीक थे बाबा तिलका मांझी : दुर्गालाल मुर्मू

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राजनगर: बाबा तिलका मांझी की 275वीं जयंती मनी

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राजनगर. राजनगर स्थित झामुमो पार्टी कार्यालय में बुधवार को बाबा तिलका मांझी की 275वीं जयंती धूमधाम से मनायी गयी. प्रखंड अध्यक्ष रामसिंह हेम्ब्रम की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बाबा तिलका मांझी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

स्वतंत्रता संग्राम के पहले आदिवासी क्रांतिकारी थे बाबा तिलका:

झामुमो केंद्रीय सदस्य बिशु हेम्ब्रम ने बाबा तिलका मांझी के संघर्षमय जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले आदिवासी क्रांतिकारी थे. उन्होंने बताया कि वर्ष 1771 से 1785 के बीच भागलपुर क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लेकर बाबा ने आदिवासी समाज में स्वाधीनता की अलख जगायी थी. उनका बलिदान आज भी हमें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देता है.

नयी पीढ़ी को उनके बलिदान से अवगत कराना जरूरी:

बुद्धिजीवी मोर्चा के जिलाध्यक्ष दुर्गा लाल मुर्मू ने कहा कि बाबा तिलका मांझी आदिवासी अस्मिता के प्रतीक थे. समाज की जिम्मेदारी है कि उनके संघर्षों की गाथा को नयी पीढ़ी तक पहुंचाया जाए. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने बाबा के आदर्शों को आत्मसात करने और समाज सेवा का संकल्प लिया. जयंती समारोह में मुख्य रूप से केंद्रीय सदस्य बिशु हेम्ब्रम, बुद्धिजीवी मोर्चा जिलाध्यक्ष दुर्गा लाल मुर्मू, प्रखंड अध्यक्ष रामसिंह हेम्ब्रम, उपाध्यक्ष भक्तू मार्डी, तपस बिसोई, रिंकु राउत, धानु टुडू, चातुर हेम्ब्रम, सुखलाल मुर्मू, सिंघु मुर्मू, घासीराम सोरेन, सीताराम हांसदा और शेखर महाकुड़ आदि उपस्थित थे.

पारकीडीह में तिलका मांझी की जयंती मनी

चांडिल. नीमडीह प्रखंड अंतर्गत पारकीडीह गांव में बुधवार को झामुमो कार्यकर्ताओं ने सिदो-कान्हो मैदान में देश के स्वतंत्रता सेनानी शहीद तिलका मांझी की जंयती मनायी. सभी ने माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया. मौके प्रखंड अध्यक्ष सचिन गोप ने कहा कि तिलका मांझी संथाल और पहाड़िया जनजाति के बीच में रहकर पले बढ़े हैं. इसलिए कुछ गैर आदिवासी इतिहासकारों को लगता है कि तिलका मांझी पहाड़िया जनजाति के हैं. उन्होंने कहा कि तिलका मांझी एक प्रमुख आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे. उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आदिवासी क्षेत्रों में संघर्ष किया. उन्होंने झारखंड और बिहार के आदिवासी इलाकों में ब्रिटिशों के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठायी. मौके पर नीमडीह प्रखंड अध्यक्ष सचिन गोप,अनिल माझी आदि उपस्थित थे.

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