ePaper

महाभारत काल से जुड़ा है सरायकेला के भीमखंदा का इतिहास, मकर संक्रांति पर उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

Updated at : 13 Jan 2026 8:39 PM (IST)
विज्ञापन
Bhimkhanda Saraikela

सरायकेला का भीमखंदा स्थित मंदिर जहां पर होती है हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर पूजा, Pic Credit- Prabhat Khabar

Bhimkhanda Saraikela: सरायकेला के राजनगर प्रखंड स्थित भीमखंदा आस्था, इतिहास और रहस्य का संगम है. मकर संक्रांति पर श्रद्धालु बोंबोगा नदी में स्नान कर शिव पूजा करते हैं. पांडवों से जुड़ी मान्यताएं आज भी लोगों की आस्था का केंद्र हैं.

विज्ञापन

Bhimkhanda Saraikela, सरायकेला, शचिंद्र कुमार दाश: सरायकेला जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर राजनगर प्रखंड में स्थित भीमखंदा आस्था, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम माना जाता है. प्राचीन मान्यताओं और लोककथाओं से जुड़ा यह स्थल मकर संक्रांति के मौके पर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है. पर्व के दिन बोंबोगा नदी में स्नान कर लोग शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन यहां पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. स्थानीय परंपरा के अनुसार द्वापर युग में पांडवों ने इस क्षेत्र में भगवान शिव की उपासना की थी. मकर संक्रांति के अगले दिन 15 जनवरी को यहां पारंपरिक मेले का आयोजन भी होता है, जिसमें दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं. नदी की शांत बहती धारा और प्राकृतिक सौंदर्य श्रद्धालुओं को सहज ही अपनी ओर खींच लेता है.

इतिहास और रहस्यों से घिरा भीमखंदा

भीमखंदा केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि कई ऐतिहासिक रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है. गांव के बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, वनवास के दौरान पांडव कुछ समय के लिए यहां ठहरे थे. मान्यता है कि भोजन पकाने के लिए पत्थरों के बीच जो चूल्हा बनाया गया था, वह आज भी यहां मौजूद है. कहा जाता है कि द्रौपदी ने इसी चूल्हे पर सभी लोगों के लिए भोजन बनाया था.

Also Read: झारखंड बीजेपी को कल मिलेगा नया कप्तान, इस बड़े नेता का अध्यक्ष बनना तय!

भीम से जुड़ा विशेष निशान भी लोगों के बीच कौतुहल का विषय

क्षेत्र में भीम से जुड़ा एक विशेष निशान भी लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है. माना जाता है कि यह निशान भी महाभारत काल के समय का ही है. इसके अलावा यहां मौजूद पत्थरों पर उकेरे गए अक्षर और चिह्न भी रहस्य पैदा करते हैं. किस लिपि में ये अंकित हैं, इसका आज तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है. संरक्षण के अभाव में ये चिह्न धीरे-धीरे धुंधले होते जा रहे हैं.

अर्जुन वृक्ष बना आस्था का प्रतीक

भीमखंदा में स्थित ‘श्री श्री एकता संकल्प वृक्ष’, जिसे अर्जुन का पेड़ भी कहा जाता है. श्रद्धालुओं के बीच यह भी विशेष आस्था का केंद्र है. इस वृक्ष की संरचना अपने आप में अनोखी मानी जाती है. इसकी शाखाओं को पांडवों और उनकी माता से जोड़कर देखा जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह वृक्ष पांडवों की एकता और पारिवारिक समरसता का प्रतीक है. मकर संक्रांति के अवसर पर भीमखंदा में उमड़ने वाली भीड़ न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि इस बात की भी गवाही देती है कि यह स्थल आज भी लोगों की श्रद्धा और विश्वास में जीवित है.

Also Read: दुआओं में छिपी माता-पिता की उम्मीद, 12 दिन से लापता अंश-अंशिका का सुराग नहीं, हनुमान जी के आगे जल रहा दिया

विज्ञापन
Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola