तीसरे दिन भी रेल रैक लोडिंग ठप, यार्ड में पसरा सन्नाटा

पत्थर व्यवसायियों ने रेलवे रैक लोडिंग नहीं करने का लिया था फैसला
साहिबगंज
साहिबगंज–पाकुड़ जिले के विकास से जुड़ी मांगों को लेकर पत्थर व्यवसायियों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा. इसके समर्थन में रेलवे के माध्यम से होनेवाली पत्थर रैक लोडिंग पूरी तरह बंद है. जिले के सभी प्रमुख मार्शलिंग यार्डों में सन्नाटा पसरा हुआ है. वहीं जिले की सड़कें भारी वाहनों से गुलजार नजर आ रही हैं. मालगाड़ी से पत्थर ढुलाई बंद रहने के बावजूद बड़े-बड़े ट्रक और लॉरियों के जरिये सड़क मार्ग से पत्थरों का परिवहन जारी है. पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार 16 जनवरी से साहिबगंज और पाकुड़ जिले के पत्थर व्यवसायियों ने रेलवे रैक लोडिंग नहीं करने का फैसला लिया था. दोनों जिलों के व्यवसायियों का पूर्ण समर्थन प्राप्त है. तीसरे दिन भी एक भी रैक की लोडिंग नहीं हो सकी, जिससे आंदोलन का असर बरकरार है.पहले से लिये गये इंडेंट किया गया रद्द
तीसरे दिन रविवार को भी मिर्जाचौकी, करमटोला, तालझारी, तीनपहाड़, धमधामिया, बाकुडी और बरहरवा सहित जिले के सभी प्रमुख मार्शलिंग यार्ड पूरी तरह सुनसान नजर आये. कई स्थानों पर रेलवे द्वारा खाली रैक भेजे गए, लेकिन आंदोलन के कारण लोडिंग नहीं हो सकी, जिसके चलते खाली रैक वापस लौटाने पड़े. पहले से लिये गये इंडेंट भी रद्द कर दिए गए हैं, जिससे रेलवे की परिचालन व्यवस्था प्रभावित हुई है. रेलवे सूत्रों के अनुसार, आंदोलन से पहले साहिबगंज क्षेत्र से प्रतिदिन औसतन 60 से 80 रैक पत्थर की लोडिंग होती थी. प्रति रैक करीब 20 लाख रुपये के राजस्व प्राप्त होता था. रेलवे को प्रतिदिन लगभग 2.5 से तीन करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है. तीसरे दिन रैक लोडिंग बंद रहने से रेलवे के राजस्व लक्ष्य और माल ढुलाई योजना पर सीधा असर पड़ रहा है.
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