मधुमक्खी पालन कर आत्मनिर्भर बना एक मजदूर, अब दूसरों को कर रहा प्रेरित

Updated at : 01 Jan 2025 8:13 PM (IST)
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मधुमक्खी पालन कर आत्मनिर्भर बना एक मजदूर, अब दूसरों को कर रहा प्रेरित

2012 में 10 बक्से से की थी शुरूआत, अब 100 बक्सों से कर रहा है लाखों की कमाई

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पतना. जहां चाह है, वहां राह है’ इसे चरितार्थ कर दिखाया है बरहरवा के सिरासीन निवासी ज़लील शेख ज़लील कभी ईंट-भट्ठे में मजदूरी व मुंशी का काम कर अपना भरण-पोषण करता था. आज वह मधुमक्खी पालन कर अच्छी आमदनी कर रहा है. इसके साथ ही वह सात से आठ युवाओं को रोजगार भी दे रहा है. अपने मधुमक्खी पालन के आइडिया के बारे में ज़लील ने बताया कि वर्ष 2012 में उन्होंने किसी तरह 50 हजार रुपये की पूंजी जुटाकर मधुमक्खी पालन की शुरूआत की. इसके लिए उसने 10 बक्से खरीदे तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर पालन शुरू की. आज उनके पास 100 बक्सा है, जिससे प्राप्त शहद को बेचकर वह साल में अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं. मौसम के अनुसार वह झारखंड, बिहार व बंगाल में मधुमक्खी पालन करते हैं. वर्तमान में वह साहिबगंज जिले के पतना प्रखंड अंतर्गत कोराडीह गांव के समीप मारिक बिंदु पहाड़ की तलहटी में मधुमक्खी पालन कर रहे हैं. ज़लील ने बताया कि मधुमक्खी पालन में उसे उद्यान विभाग की ओर से सहायता भी मिली. 2020 में विभाग द्वारा उन्हें 40 बक्सा प्राप्त हुआ, जिससे वे मधुमक्खी पालन को और विस्तार दे पाये. वर्तमान में वह अपने साथ सात से आठ युवाओं को काम भी दे रहे हैं. उन्हें एक मौसम में करीब 10 से 12 क्विंटल शहद प्राप्त होता है.

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