टंडवा के चंद्रगुप्त कोल परियोजना से कोयले का डिस्पेच शुरू, सीसीएल ने ली राहत की सांस

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चतरा के टंडवा स्थित सीसीएल की चंद्रगुप्त कोल परियोजना.

Chatra News: चतरा के टंडवा स्थित सीसीएल की चंद्रगुप्त कोल परियोजना से कोयले का डिस्पेच शुरू हो गया है. पहले दिन 450 टन कोयला एनटीपीसी नॉर्थ कर्णपुरा भेजा गया. ग्रामीणों के साथ सहमति बनने के बाद परिवहन शुरू हुआ. परियोजना में 527 मिलियन टन कोयले का भंडार मौजूद है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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चतरा से दीनबंधू और वरुण की रिपोर्ट

Chatra News: झारखंड में चतरा जिले के टंडवा स्थित सीसीएल की बहुप्रतीक्षित चंद्रगुप्त कोल परियोजना से रविवार शाम से कोयले का डिस्पेच शुरू हो गया. पहले दिन 15 हाइवा के माध्यम से करीब 450 टन कोयला एनटीपीसी नॉर्थ कर्णपुरा परियोजना के लिए भेजा गया. कोयला परिवहन शुरू होने के साथ ही सीसीएल के अधिकारियों और परियोजना का संचालन कर रही एमडीओ कंपनी सुशी माइनिंग ने राहत की सांस ली है. लंबे समय से उत्पादन के बावजूद डिस्पेच शुरू नहीं होने के कारण परियोजना प्रबंधन की चिंता बढ़ रही थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य होती दिखाई दे रही है.

फरवरी में शुरू हुआ था ओबी खनन

चंद्रगुप्त कोल परियोजना में 17 फरवरी से ओवरबर्डन (ओबी) हटाने का कार्य शुरू किया गया था. इसके करीब एक महीने बाद 21 मार्च से कोयला उत्पादन की शुरुआत हुई. अब तक इस परियोजना से लगभग 10 लाख टन कोयले का उत्पादन किया जा चुका है, जबकि 17 लाख क्यूबिक मीटर ओबी का निष्पादन भी किया गया है. हालांकि, उत्पादन शुरू होने के बावजूद कोयले का परिवहन नहीं हो पाने से सीसीएल और सुशी माइनिंग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी.

ग्रामीणों के साथ बातचीत के बाद बनी सहमति

स्थानीय ग्रामीणों की कुछ मांगों और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर डिस्पेच शुरू नहीं हो पा रहा था. इस कारण परियोजना प्रबंधन की चिंता लगातार बढ़ रही थी. बाद में ग्रामीणों के साथ रोजगार सहित अन्य मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत हुई, जिसके बाद सहमति बनी और रविवार को कोयले का परिवहन शुरू हो सका. आखिर खदानों में सिर्फ मशीनों की आवाज ही काफी नहीं होती, आसपास के गांवों की सहमति भी उतनी ही जरूरी होती है. कोयला जमीन से निकल सकता है, लेकिन सामाजिक सहमति के बिना सड़क तक पहुंचना हमेशा आसान नहीं होता.

डेढ़ लाख टन कोयले की हुई है बुकिंग

जानकारी के अनुसार चंद्रगुप्त परियोजना से फिलहाल करीब डेढ़ लाख टन कोयले की बुकिंग की गई है. इसमें एक लाख टन कोयला एनटीपीसी नॉर्थ कर्णपुरा को भेजा जाएगा, जबकि 50 हजार टन कोयले की आपूर्ति रोड सेल के माध्यम से की जाएगी. कोयले के डिस्पेच की शुरुआत होने से परियोजना की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

नए वित्तीय वर्ष में 4.5 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य

सीसीएल ने नए वित्तीय वर्ष में चंद्रगुप्त परियोजना से 4.5 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है. भविष्य में इस परियोजना की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 15 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाने की योजना है. विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना आने वाले वर्षों में सीसीएल की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल होगी और क्षेत्र के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाएगी.

527 मिलियन टन कोयले का है भंडार

करीब 3331 एकड़ क्षेत्र में फैली चंद्रगुप्त कोल परियोजना में 527 मिलियन टन कोयले का विशाल भंडार मौजूद है. इस परियोजना की कुल निर्धारित अवधि 41 वर्ष है. वर्तमान में 25 वर्षों के लिए एमडीओ मोड के तहत इसका ठेका सुशी माइनिंग को दिया गया है.

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टंडवा और केरेडारी की जमीन पर परियोजना विकसित

यह परियोजना टंडवा और केरेडारी अंचल की जमीन पर विकसित की जा रही है. केरेडारी अंचल के चट्टी बरियातू में 204 एकड़, जोरदाग में 545 एकड़, नवाखाप में 139 एकड़, पचड़ा में 722 एकड़, सिझुआ में 565 एकड़ और बुकरु में 997 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया है. वहीं टंडवा के उरसू क्षेत्र में 158 एकड़ भूमि इस परियोजना के लिए ली गई है. कोयले के डिस्पेच की शुरुआत के साथ अब चंद्रगुप्त परियोजना के पूरी तरह गति पकड़ने की उम्मीद बढ़ गई है, जिससे क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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