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साहिबगंज जिला को हरा-भरा करने के तैयारी में जुट वन विभाग

Updated at : 26 Jul 2025 8:30 PM (IST)
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साहिबगंज जिला को हरा-भरा करने के तैयारी में जुट वन विभाग

जिले में फलदार, इमारती, औषधीय, विलुप्त सहित 30 विभिन्न प्रजातियों के लगाये जायेंगे सात लाख पौधे

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बरहेट. जिले को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से वन विभाग इस वर्ष पूरे जिले में 7 लाख इमारती व फलदार पौधे लगायेगा. जिसे लेकर विभाग ने बारिश शुरू होते ही जुलाई माह के प्रथम सप्ताह से ही तैयारी शुरू कर दी है. विभाग के अनुसार चिन्हित स्थानों पर अब तक चार लाख गड्ढे खोदकर पौधा लगाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है. वहीं, शेष बचे 3 लाख गड्ढों की खुदाई भी चल रही है. इसमें सागवान, शीशम, पीपल, बरगद, अमरुद, आम, गम्हार, गोल्ड मोहर, कनक चंपा, आंवला, सेमल, बबूल, नीम, इमली और बकेन सहित फलदार, इमारती, औषधीय, विलुप्त सहित 30 विभिन्न प्रजातियों के पौधे शामिल हैं. बताते चलें कि साहिबगंज जिले में कुल वन भौगोलिक क्षेत्र 28425.74 हेक्टेयर है. जिसमें से 4671.33 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र है. इसके अलावे, संताल परगना का सबसे घना वन क्षेत्र साहिबगंज जिले में 19.72 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. इसमें बरहरवा, राजमहल, मंडरो सभी रेंज घने वन क्षेत्र आते हैं. पर्यावरण हरा-भरा बनाने को लेकर प्रतिवर्ष वन विभाग के द्वारा पौधारोपण किया जाता है. वन विभाग के अलावे ग्रामीण विकास विभाग, शिक्षा विभाग, विद्युत विभाग, सिंचाई विभाग, कल्याण विभाग, जलछाजन विभाग, कृषि विभाग व उद्यान विभाग के लिये हजारों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. जिला वन अधिकारी प्रबल गर्ग ने सभी रेंज के वन रक्षी से लेकर जिले के वनपाल तक के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया है. कहते हैं डीएफओ साहिबगंज डीएफओ प्रबल गर्ग ने बताया कि अबकी बार 30 से अधिक प्रकार की नर्सरी प्रजातियों के साथ सात लाख पौधरोपण किया गया है. वर्तमान समय में पौधारोपण बहुत जरूरी है. पौधरोपण को आंदोलन बनाना होगा. इसे जन-जन तक पहुंचाना होगा. हर कोई पर्यावरण को सुधारने में अपना-अपना योगदान दे. पौधरोपण से साहिबगंज के पर्यावरण में बहुत सुधार हुआ है. कोरोना महामारी ने हमें बता दिया है कि मानव जीवन में ऑक्सीजन का क्या महत्व है. वायुमंडल में अधिक मात्रा में ऑक्सीजन होगा, तभी हमें शुद्ध हवा मिलेगी. वन महोत्सव कार्यक्रम के साथ जिले में पौधारोपण संरक्षण व संवर्धन भी जरूरी है, तभी पौधे बचेंगे. पर्यावरण संतुलन के लिये भी यह जरूरी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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