सूखते जंगल को मिला नया जीवन, FMNR तकनीक से लौट रही हरियाली, जानें पूरी प्रक्रिया

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जंगल और झरना की सफाई करते कर्मी | Prabhat Khabar Network

साहिबगंज में एफिकोर की FMNR तकनीक ने 43 गांवों में वन संरक्षण को नई दिशा दी. जानें कैसे लौटा जंगल का सुनहरा कल.

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साहिबगंज. जिले के बोरियो प्रखंड के पोखरिया गांव में एफिकोर की पुनर्निर्माण परियोजना के तहत किसानों द्वारा संचालित प्राकृतिक पुनर्जनन तकनीक को अपनाकर प्राकृतिक वन क्षेत्र के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. संस्था के कॉर्डिनेटर विजय मेशाक, बोडक्लिवर लॉरेंस हांसदा, जोसिया कराडा, रीना टुडू और संजीत मालतो की मेहनत से गांव में विकास और वन संरक्षण का कार्य आगे बढ़ रहा है. गांव के प्रधान सुरजा पहाड़िया, सदस्य सुनील पहाड़िया, मंगला पहाड़िया और मैसा पहाड़िया भी इस कार्य में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.

प्राकृतिक पौधों और नई कॉपलों के संरक्षण पर जोर

इस पहल से गांव के वन क्षेत्र में प्राकृतिक पौधों के संरक्षण और विकास को बढ़ावा मिल रहा है. साथ ही ग्रामीणों में जंगल और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता तथा सामुदायिक जिम्मेदारी मजबूत हुई है.

एफएमएनआर यानी किसान प्रबंधित प्राकृतिक पुनर्जनन एक सरल और कम लागत वाली तकनीक है. इसमें जंगल एवं भूमि में पहले से मौजूद पेड़ों की जड़ों, प्राकृतिक पौधों और नई कॉपलों को सुरक्षित रखते हुए उनकी उचित देखभाल और प्रबंधन किया जाता है. प्राकृतिक रूप से उगने वाले पौधों को संरक्षण देकर वन क्षेत्र को धीरे-धीरे पुनर्जीवित किया जा सकता है.

प्रशिक्षण के बाद ग्रामीणों ने संभाली जंगल की जिम्मेदारी

पुनर्निर्माण परियोजना के अंतर्गत एफिकोर द्वारा पोखरिया गांव के ग्रामीण समुदाय को एफएमएनआर तकनीक के बारे में प्रशिक्षण और जागरूकता प्रदान की गयी. प्रशिक्षण के बाद ग्रामीणों ने जंगल में मौजूद प्राकृतिक पौधों और पेड़ों की सुरक्षा, अनावश्यक शाखाओं की छंटाई तथा नई कॉपलों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना शुरू किया. इससे वन क्षेत्र में प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा मिला है और जंगल की हरियाली को बनाए रखने में समुदाय की भूमिका मजबूत हुई है.

पोखरिया गांव के ग्रामीणों के अनुसार, पहले जंगल के संरक्षण को लेकर सामूहिक प्रयास सीमित थे. एफएमएनआर तकनीक की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने जंगल को अपनी साझा जिम्मेदारी मानते हुए इसके संरक्षण और देखभाल पर ध्यान देना शुरू किया है.

43 गांवों में समुदाय के साथ काम कर रही परियोजना

पुनर्निर्माण परियोजना वर्तमान में बोरियो प्रखंड के 43 गांवों में समुदाय के साथ मिलकर कार्य कर रही है. परियोजना के माध्यम से खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि, आजीविका तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में समुदाय को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है. एफएमएनआर इसी व्यापक प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

अन्य गांवों के लिए बन सकता है उपयोगी मॉडल

पोखरिया गांव में एफिकोर की पुनर्निर्माण परियोजना के माध्यम से किया जा रहा यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन का प्रेरक उदाहरण बन रहा है. ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी के साथ एफएमएनआर तकनीक आने वाले समय में बोरियो प्रखंड के अन्य गांवों में भी प्राकृतिक वन पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोगी मॉडल बन सकती है.


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सुनील ठाकुर

लेखक के बारे में

By सुनील ठाकुर

साहिबगंज : सुनील ठाकुर वर्ष 1999 से प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने एक वर्ष तक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए भी कार्य किया है. शिक्षा, अपराध और संताल परगना में पहाडिया जनजाति जैसे विषयों पर उनकी विशेष पकड़ रही है तथा इन मुद्दों पर लगातार रिपोर्टिंग करते रहे हैं. कला, संस्कृति एवं साहित्य में उनकी गहरी रुचि है. वर्ष 2006 से साहिबगंज में जिला संवाददाता व ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं.

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