800 करोड़ से बनेगा जीवाश्म उद्यान

Updated at : 04 Dec 2016 4:30 AM (IST)
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800 करोड़ से बनेगा जीवाश्म उद्यान

खुशखबरी . डीपीआर बनाने सोमवार को मंडरो आयेगी टीम बीरबल साहनी फॉसिल्स पार्क होगा इसका नाम साहिबगंज : साहिबगंज जिले के मंडरो प्रखंड में दुर्लभ जीवाश्म के संरक्षण के लिए तारा व गुरमी पहाड़ स्थित 33 हेक्टेयर वनभूमि पर फाॅसिल्स पार्क जीवाश्म उद्यान ईको टूरिज्म पार्क का निर्माण 800 करोड़ की लागत से होगा. यह […]

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खुशखबरी . डीपीआर बनाने सोमवार को मंडरो आयेगी टीम

बीरबल साहनी फॉसिल्स पार्क होगा इसका नाम
साहिबगंज : साहिबगंज जिले के मंडरो प्रखंड में दुर्लभ जीवाश्म के संरक्षण के लिए तारा व गुरमी पहाड़ स्थित 33 हेक्टेयर वनभूमि पर फाॅसिल्स पार्क जीवाश्म उद्यान ईको टूरिज्म पार्क का निर्माण 800 करोड़ की लागत से होगा. यह बातें वन विभाग के डीएफओ मनीष तिवारी ने कही. कहा : सोमवार को कोलकाता के जोसकोन सर्विस के टीम डीपीआर बनाने के लिये साहिबगंज आ रही है. साहिबगंज जिले के मंडरो प्रखंड के तारा व गुरमी पहाड़ पर फॉसिल्स पार्क और ईको टूरिज्म पार्क निर्माण के लिए तैयार डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है. निर्माण के लिए एजेंसी के चयन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है. जल्द ही कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा. फिलहाल चहारदीवारी निर्माण विभाग की ओर से प्रारंभ कराया जायेगा.
आर्किटेक्ट के डीपीआर की स्वीकृति मिली
सरकार के पास तीन कंपनी केटकी कंसलटेंसी इंजीनियरिंग सर्विस रांची, जोसकोन सर्विस कोलकाता व अर्चिता इंजीनियरिंग रांची को बुलाया गया है. उन्हाेंने कहा कि विभाग के निर्देश पर आर्किटेक्ट से तैयार कराई गई डीपीआर को सरकार की स्वीकृति मिल गयी है.
क्या होगा पार्क में
पर्यटकों को लुभाने के लिए गुरमी पहाड़ पर आधुनिक इको टूरिज्म कॉम्पलेक्स का निर्माण कराया जायेगा. टूरिज्म कॉम्पलेक्स में रिसर्च लेबोरेटरी, म्यूजियम, ऑडिटोरियम, लाइब्रेरी, इको, रिसोर्ट, टूरिस्ट लॉज व रेस्ट हाउस भी बनाए जायेंगे. फॉसिल्स की जानकारी से संबंधित प्रदर्शनी लगायी जायेगी.
पार्क का नाम तय
इसका नाम बीरबल साहनी फॉसिल्स पार्क रखा गया है. बता दें कि बीरबल साहनी रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ के निदेशक प्रो सुनील वाजपेयी के निर्देश पर वैज्ञानिकों के तीन सदस्यीय दल डॉ अमित कुमार घोष, डॉ श्रीकांत मूर्ति और डॉ एस सुरेश कुमार पिल्लई के साथ वन प्रमंडल पदाधिकारी साहिबगंज ने पार्क के लिए प्रस्तावित स्थल प्रभण 11 व 12 नवंबर को किया था. टीम ने इस स्थल को उपयुक्त बताया था. भूगर्भ शास्त्री ओल्डहम और मॉरिस ने 1833 और बीरबल साहनी इंस्टीच्यूट ऑफ पालाबॉटनी के संस्थापक प्रो बीरबल साहनी ने 1928 में राजमहल की पहाड़ियों पर अति दुर्लभ फॉसिल्स का जिक्र किया था. साथ ही इसके संरक्षण की बात कही थी. दरअसल, वन विभाग ने दस आर्किटेक्ट कंपनियों को प्राक्कलन बनाने का निर्देश दिया था. इनमें केतकी कंसल्टेंसी इंजीनियरिंग सर्विसेज रांची, जासकन सर्विसेज कोलकाता और अर्चिता डिजाइनर्स रांची ने लेआउट प्लान समर्पित किया था. जासकन सर्विसेज कोलकाता के लेआउट के आधार पर तैयार 800 करोड़ की डीपीआर को विभाग और वैज्ञानिकों की टीम ने स्वीकृत करते हुए मंजूरी के लिए सरकार को भेजा है. उसी के आधार पर टीम आ रही है.
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