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Published at :20 Nov 2015 8:04 PM (IST)
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झारखंड सूचना आयोग कर रहा तैयारी अब जिला मुख्यालय में होगी सूचना संबंधित मामलों की सुनवाईएक अच्छी खबर है. अब सूचना आयोग तैयारी कर रहा है कि जिला मुख्यालयों में ही मामलों की सुनवाई हो जाय. झारखंड सूचना आयुक्त ने इसके संकेत भी दे दिये हैं. कहा है कि जल्द ही अनुमंडल स्तर के पदाधिकारी […]

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झारखंड सूचना आयोग कर रहा तैयारी अब जिला मुख्यालय में होगी सूचना संबंधित मामलों की सुनवाईएक अच्छी खबर है. अब सूचना आयोग तैयारी कर रहा है कि जिला मुख्यालयों में ही मामलों की सुनवाई हो जाय. झारखंड सूचना आयुक्त ने इसके संकेत भी दे दिये हैं. कहा है कि जल्द ही अनुमंडल स्तर के पदाधिकारी से पत्राचार किया जायेगा और इसे धरातल पर लाया जायेगा. सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर से साक्षात्कार के कुछ अंश…सवाल : सूचना का अधिकार के प्रति लोगों में जागरूकता के अभियान में आपको अब तक कितनी सफलता मिली है ?सफलता कितनी मिली है, इसका आकलन मैं स्वयं नहीं कर सकता हूं. मैं तो केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा हूं. संवैधानिक जिम्मेवारियों के निर्वहन के साथ–साथ अपने दायित्वों के निर्वहन में ईमानदारी और पारदर्शिता बरतते हुए अभियान चलाया हुआ हूं. इसमें अगर समाज के सभी वर्गों खासकर मीडिया का साथ मिलें, तो मुझे पूर भरोसा है कि यह अभियान अपने तार्किक परिणति तक पहुंचेगा. आमलोगों में आपके जागरूकता अभियान का क्या कोई असर पड़ रहा है?मुझे आयोग में कामकाज संभाले हुए अभी सिर्फ छह महीने हुए हैैं. मैंने जहां भी जागरूकता अभियान का कार्यक्रम किया है, वहां पर लोगों में सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. लेकिन इसका असली मकसद तब पूरा होगा, जब लेाग केवल निजी सूचनाओं से संबंधित आवेदन नहीं देकर सार्वजनिक हित से संबंधित सूचना प्राप्त करने के लिए भी आवेदन देंगे. धीरे–धीरे चीजों में बदलाव हो रहा है. मैं आशावादी हूं और मुझे उम्मीद है कि धीरे–धीरे लोग सार्वजनिक हितों से संबंधित सूचना मांगने में भी एक नई मिसाल कायम करेंगे. ताकि प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता आ सके. जिला मुख्यालयों में शुरू किया गया आपका अभियान क्या ग्रामीण इलाकों में पहुंचेगा?यह अभियान केवल जिला मुख्यालयों में ही नहीं प्रखंड स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक जाएगा. अभी तो केवल शुरुआत है. पंचायत चुनाव के कारण हमने अभी अपने अभियान को विराम दिया है. पंचायत चुनाव की प्रक्रिया खत्म होने के बाद मैं जागरूकता अभियान को प्रखंड स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक भी लेकर जाउंगा. मेरा मानना है कि जब तक गांवों तक लोगों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता नहीं आएगी, तब तक न तो इस एक्ट का और न ही अन्य योजनाओं का लाभ आमलोगों को मिल सकता है. इसलिए मैं पूरे राज्य के गांव में रहने वाले शिक्षित एवं प्रबुद्ध लोगों से अपील करना चाहूंगा कि वो अपने अधिकारों के प्रति न सिर्फ सजग रहें, बल्कि आम लोगों में जागरूकता अभियान में अपनी भूमिका अदा करें, ताकि गांव के लोग अपने अधिकारों और योजनाओं से वंचित न रह पाएं. सकारात्मक सोच से ही हम आगे बढ़ सकते हें और इसमें सबको अपनी भूमिका अदा करनी चाहिए.ग्रामीण इलाकों में जागरूकता लाने के लिए कोई कार्ययोजना बनाई है ?मैं आपकी बातों से अक्षरश: सहमत हूं कि ग्रामाीण इलाकों में सूचना के अधिकार के प्रति जागरूकता का अभाव है. मेरा मानना है कि लोगों में जागरूकता के अभाव के कारण ही कई अधिकार जो जनता के हैं, वे उन तक नहीं पहुंचता है तो भी जनता अधिकारियों से सवाल नहीं पूछ पाते, क्योंकि उन्हें अपने अधिकारों का ही पता नहीं है. यहां पर मैं आरटीआई एक्ट की धारा 4 (1) (बी) का जिक्र करना चाहूंगा, जिसमें यह प्रावधान किया गया है कि सभी लोक प्राधिकार अपने प्राधिकार से संबंधित सभी सूचनाएं सार्वजनिक करेंगे. मसलन उनके प्राधिकार में कितने कर्मचारी हैं? किस मद में कितना खर्च हुआ है? किस अधिकारी और कर्मचारी की क्या डयूटी है? किस मद में कितना देर किया गया? किसे कितना भुगतान किया गया? सारी बातों को सार्वजनिक तौर पर प्रकाशित करने का प्रावधान है. लेकिन आज एक्ट के इस प्रावधान का पालन नहीं हो रहा है. प्रखंड विकास पदाधिकारी को अपने पंचायत सेवकों से ये रिपोर्ट लेकर ये सार्वजनिक किया जाना चाहिए था कि किस पंचायत में किस मद में कितनी राशि खर्च की गई? उस पंचायत में कौन–कौन योजनाएं आई और उससे कितने लागों को लाभान्वित किया गया ? यदि इसकी जानकारी सार्वजनिक होती, तो लोग यह जान पाते कि उनके लोक प्राधिकार ने उनके हित में क्या किया है और उनके लिए कौन कौन–सी योजनाएं आई थी? जन सूचना पदाधिकारी आरटीआई एक्ट को अभी गंभीरता से नहीं लेते हैं. आखिर चूक कहां हो रही है ?गंभीतरा से नहीं लेते हैं, ऐसा कुछ मामलों में हो सकता हैं. यदि वे वाकई गंभीरता से नहीं लेते हैं, तो अब आयोग की सख्ती उन्हें अब आरटीआई को गंभीरता से लेने को मजबूर कर रहा है. बड़ी संख्या में आरटीआई एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के तहत जनसूचना पदाधिकारी के खिलापफ कार्रवाई की जा रही है. इसलिए हलके में लेने की शिकायत से मैं सहमत नहीं हूं. हो सकता है कि कुछ अधिकारी ऐसा करते हों. लेकिन अपवादों के आधार पर धारणा नहीं बनानी चाहिए.अपीलकर्ता को रांची आने जाने में काफी परेशानी होती है. अपीलकर्ताओं को इन परेशानियों से मुक्ति में क्या आयोग कोई पहल कर रहा है?आयोग प्रमंडल मुख्यालय या जिला मुख्यालय में सुनवाई की योजना पर विचार कर रहा है. इस दिशा में जल्द ही आयोग सरकार के संबंधित विभाग से पत्रचार करेगा. यदि आयोग को इस दिशा में सहयोग किया गया और समुचित और आवष्यक संसाधान उपलब्ध कराए गए, तो हो सकता है कि अपीलकर्ता को रांची आने जाने में आ रही दिक्कतों को कम या खत्म किया जा सके.

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