ओके ::::: गवई संस्कृति के विराट वैभव थे मधुरकमल : रामजन्म

Updated at :19 Nov 2014 7:02 PM
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ओके :::::   गवई संस्कृति के विराट वैभव थे मधुरकमल :  रामजन्म

प्रतिनिधि, साहिबगंज अनेक बहुचर्चित उपन्यासों के कथाकार एवं गोपाल सिंह पुरस्कार प्राप्त कमलाकांत उर्फ मधुरकमल का निधन उनके पैतृक गांव घोघा में हो गया. प्रगति वार्ता पाठक विचार मंच के तत्वावधान में शोकसभा का आयोजन किया गया. जिसकी अध्यक्षता प्रगति वार्ता के वरिष्ठ पत्रकार डॉ रामजन्म मिश्र ने किया. श्री मिश्र ने कहा कि मधुरकमल […]

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प्रतिनिधि, साहिबगंज अनेक बहुचर्चित उपन्यासों के कथाकार एवं गोपाल सिंह पुरस्कार प्राप्त कमलाकांत उर्फ मधुरकमल का निधन उनके पैतृक गांव घोघा में हो गया. प्रगति वार्ता पाठक विचार मंच के तत्वावधान में शोकसभा का आयोजन किया गया. जिसकी अध्यक्षता प्रगति वार्ता के वरिष्ठ पत्रकार डॉ रामजन्म मिश्र ने किया. श्री मिश्र ने कहा कि मधुरकमल गवई संस्कृति के विराट वैभव के नवगीतकार थे. मधुरकमल ने स्नातक की शिक्षा साहिबगंज महाविद्यालय से प्राप्त की. नव गीत के अलावे मधुर कमल ने अनेक उपन्यास, कहानी संग्रह आदि प्रकाशित किये. वरीय पत्रकार राजेंद्र प्रसाद ठाकुर ने कहा कि मधुरकमल सहज और सरल व्यक्ति थे. उनके नवगीत में इनके साहित्यकारी आत्मा का वास है. इसके अलावे मुरलीधर ठाकुर, प्रसन्न कुमार आचार्य, रामलाल परिधर, सच्चिदानंद, गंगा प्रसाद राय, विवेकानंद, कल्याणमय दे ने अपनी संवेदना व्यक्त की. सच्चिदानंद ने मधुर कमल के साहित्य से परिचय करते हुए कहा कि सिरहाने का इंद्रधनुष, आओ न कम्का, तिल्लो जलकुंभी, केचुल, अनछुया सहित अन्य उपन्यास उनकी अनुपम कृति है.

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