पोस्टमार्टम हाउस में पड़ा है 200 से अधिक शवों का बिसरा

Updated at : 04 Jan 2018 5:29 AM (IST)
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पोस्टमार्टम हाउस में पड़ा है 200 से अधिक शवों का बिसरा

साहिबगंज : जहरीला पदार्थ खाने या दूसरे संदेहास्पद परिस्थिति में हुई मौत के मामले में पुलिस अनुसंधान में सबसे बड़ा साक्ष्य बिसरा जांच रिपोर्ट होती है. बिसरा के माध्यम से ही डॉक्टर या पुलिस के समक्ष मौत की वजह स्पष्ट हो पाती है. इस वजह से ऐसे मामले में शव के पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर […]

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साहिबगंज : जहरीला पदार्थ खाने या दूसरे संदेहास्पद परिस्थिति में हुई मौत के मामले में पुलिस अनुसंधान में सबसे बड़ा साक्ष्य बिसरा जांच रिपोर्ट होती है. बिसरा के माध्यम से ही डॉक्टर या पुलिस के समक्ष मौत की वजह स्पष्ट हो पाती है. इस वजह से ऐसे मामले में शव के पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर बिसरा को सुरक्षित रखकर जांच के लिए धनबाद व रांची के फोरेंसिंक लैब भेज देते हैं.

सदर अस्पताल में बने पोस्टमार्टम हाउस के स्टोर रूम में रखे ऐसे दर्जनों बिसरा लंबे समय से जांच के लिए फोरेंसिंक लैब नहीं भेजे गये हैं और वह असुरक्षित पड़ा है. इनमें से कई बिसरा करीब पांच साल से पड़ा है. सूत्रों के अनुसार, आवश्यक केमिकल के अभाव में यहां बिसरा नमक के घोल में डूबो कर रखा गया है. नमक के घोल में रखने से कई बार जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजे गये बिसरा को खराब हो जाने की बात कह दी जाती है. ऐसे में कई बार इन बिसरा से कुछ भी नतीजा नहीं निकल पाता है. लिहाजा ऐसे आपराधिक मामलों में अभियुक्तों को कानूनी लाभ मिल जाता है.

नमक के घोल में रखा है बिसरा
सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस के स्टोर रूम में सालों से करीब 200 से अधिक बिसरा यूं रखा हुआ है. इन बिसरों को प्लास्टिक या शीशा के जार में नमक के घोल में डुबो कर रखा गया है. बताया जाता है कि बिसरा को सुरक्षित रखने के लिए शीशा के जार में फॉरमोलिक नामक केमिकल के घोल डालकर रखने का प्रावधान है. सूत्रों की मानें तो जिला स्वास्थ्य विभाग को संबंधित केमिकल आपूर्ति नहीं होने से मजबूरन नमक के घोल में ही बिसरा को रख कर फोरेसिंक जांच के लिए भेजना पड़ता है.
जांच के लि‍ए भेजना पुलिस का काम, बरत रही लापरवाही
बिसरा को फोरेंसिक लैब तक भिजवाने का जिम्मा संबंधित पुलिस पदाधिकारी को है, लेकिन कई बार लापरवाही के चलते महीनों तक पोस्टमार्टम हाउस में सुरक्षित रखे गये बिसरा को जांच के लिये फोरेंसिक लेब नहीं भेजा जाता. ऐसे में बिसरा नष्ट होने का खतरा रहता है.
इन मामलों में बिसरा जरूरी
बिसरा जांच रिपोर्ट की जरूरत किसी के संदेहास्पद स्थिति में हुई मौत के मामले में सबसे अधिक होती है. पुलिस के अनुसंधान में आत्महत्या, हत्या व प्राकृतिक मौत के बीच के फासले को चिह्नित करने में मदद मिलती है. ऐसे मामलों में डॉक्टर शव के पोस्टमार्टम के क्रम में बिसरा को सुरक्षित रखकर फोरेंसिक लैब भेजकर जांच करवाता है.
संबंधित कांड के अनुसंधानकर्ता को पोस्टमार्टम हाउस में रखे बिसरा को जांच के लिए भेजवाने का आदेश दिया जायेगा. जांच रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई होगी.
पी मुरूगन, एसपी, साहिबगंज
फॉरमोलिन नामक केमिकल आसानी से उपलब्ध नहीं होने पर नमक के घोल में बिसरा को सुरक्षित रखा जाता है. नमक का घोल भी बिसरा को सुरक्षित रखने में मदद करता है.
डॉ बी मरांडी, सिविल सर्जन, साहिबगंज
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