Ranchi News : धनतेरस से जगमगायेगा रांची का बाजार
Updated at : 16 Oct 2025 8:51 PM (IST)
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दीपोत्सव के पहले दिन धनतेरस, दूसरे दिन भगवान धनवंतरि की पूजा, हनुमान जयंती और छोटी दीपावली, तीसरे दिन दीपावली और काली पूजा, चौथे दिन गोवर्धन पूजा और अंतिम दिन भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा होगी.
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पांच दिवसीय दीपोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में, घरों और दुकानों की सजावट, पूजा सामग्री और आभूषणों की खरीदारी में बढ़ी लोगों की भागीदारी
रांची. पांच दिवसीय दीपोत्सव का त्योहार इस शनिवार से शुरू हो रहा है. दीपोत्सव के पहले दिन धनतेरस, दूसरे दिन भगवान धनवंतरि की पूजा, हनुमान जयंती और छोटी दीपावली, तीसरे दिन दीपावली और काली पूजा, चौथे दिन गोवर्धन पूजा और अंतिम दिन भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा होगी. इस तरह पांच दिवसीय पर्व की समाप्ति होगी. धनतेरस इस बार शनिवार को मनाया जायेगा. पंडित कौशल कुमार मिश्र के अनुसार, इस दिन की गयी खरीदारी घर में धन, सौभाग्य और समृद्धि बढ़ाने वाली मानी जाती है. प्रदोष काल में त्रयोदशी मिलने के कारण इस दिन सोना-चांदी, नये बर्तन और कीमती वस्तुएं खरीदना शुभ होता है.धनतेरस का शुभ मुहूर्त
धनतेरस : शनिवार को मनाया जायेगा. इस दिन दोपहर 1.20 बजे के बाद से त्रयोदशी लग रहा है. रविवार की दोपहर 1.55 बजे तक रहेगा. शनिवार को प्रदोष काल में त्रयोदशी मिलने के कारण धनतेरस मनाया जायेगा. रविवार को उदयाकाल में त्रयोदशी मिलने के कारण इस दिन भगवान धनवंतरि और कामेश्वरी की जयंती मनायी जायेगी. वहीं, शाम में हनुमान जयंती मनायी जायेगी. इसी दिन नरक चतुर्दशी और छोटी दीपावली है.दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और मां काली की पूजा का समय
दीपावली : दीपों का त्योहार दीपावली सोमवार को मनाया जायेगा. इस दिन दोपहर 2.55 बजे के बाद से अमावस्या लग रहा है, जो मंगलवार की शाम 4.26 बजे तक रहेगा. रात में निशिथ काल में अमावस्या मिलने के कारण काली पूजा होगी. मंगलवार को स्नान-दान व श्राद्ध की अमावस्या है. इस दिन गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व है. दीपावली के दिन वृष लग्न शाम 7.12 से रात 9.08 बजे तक है. यह समय पूजा के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है. इसके अलावा कुंभ लग्न दिन के 2.36 से शाम 4.07 बजे तक है. इसे भी स्थिर लग्न माना गया है. वहीं, सिंह लग्न रात 1.40 से 3.54 बजे तक है. वहीं, निशिथ काल रात 11.33 से 12.23 बजे तक है. यह समय काली पूजा के लिए उतम समय है. इस अवधि में सिंह लग्न नहीं मिलने के कारण सिर्फ मां काली की पूजा की जायेगी.त्योहार का महत्व और बाजार की रौनक
धनतेरस से शुरू होने वाले दीपोत्सव में खरीदारी केवल सामग्री जुटाने तक सीमित नहीं रहती है. यह त्योहार घर और प्रतिष्ठान की सजावट, पारिवारिक मिलन, पूजा-अर्चना और सामाजिक रौनक का प्रतीक है. रांची के बाजारों में हर उम्र के लोग दीपावली की खरीदारी में जुटे हैं. बच्चों के खिलौने, रंग-बिरंगे दीये, कैंडल्स, आभूषण और सजावटी सामान के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक वस्तुओं की भी भारी मांग है.अपनी राशि अनुसार करें खरीदारी
मेष : पीतल के बर्तन, चांदी के सिक्के या आभूषण, तांबे के बर्तन, जमीन या निवेश भी शुभ.वृषभ : सोने और हीरे के आभूषण, चांदी, प्लेटिन और अन्य घरेलू सामान.
कर्क : माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं (पीतल, मिट्टी या चांदी).सिंह : सोने का आभूषण, तांबे के बर्तन.
कन्या : कांसे के बर्तन, पूजन सामग्री, गिन्नी.तुला : चांदी की चीजें और देवी-देवताओं की मूर्तियां.
वृश्चिक : झाड़ू, बर्तन, सजावट की वस्तुएं, सोना, चांदी, जमीन.धनु : घर सजाने का सामान, सोने के आभूषण, पीतल के बर्तन, सोने के सिक्के.
मकर और कुंभ : गाड़ी, जमीन, सोना, कांसे के बर्तन और अन्य कीमती वस्तुएं.मीन : सोना-चांदी के गहने, बर्तन और अन्य सामान.
साथ ही धनिया, हल्दी, कौड़ी, नागकेशर, शहद, सेंधा नमक, कमल गट्टा, मजीठ, पोटली, पूजा सामग्री, मूर्तियां और झाड़ू जैसी वस्तुएं भी खरीदने के लिए शुभ मानी जाती हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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