World Tribal Day: झारखंड की ये 3 आदिवासी महिलाएं समाज को सशक्त बनाने के लिए कर रही काम

Published by : Sameer Oraon Updated At : 09 Aug 2024 6:16 PM

विज्ञापन

आज विश्व आदिवासी दिवस है. इस समाज को आगे बढ़ाने में कई लोगों ने उल्लेखनीय योगदान दिया है. इनमें से कुछ महिलाएं ऐसी हैं जो अपनी भाषा को समृद्ध बनाने के लिए काम कर रही है. आज हम इन्हीं महिलाओं के बारे में इस आर्टिकल में चर्चा करेंगे.

विज्ञापन

रांची : आज समाज को बेहतर बनाने में आदिवासियों के योगदान व उनकी संस्कृति को याद करने का दिन है. यह आदिवासियों की कला-संस्कृति को संरक्षित करने का भी दिन है. इस मौके पर हम अपने पाठकों को आदिवासी समाज की तीन सशक्त महिलाओं से रूबरू करा रहे हैं, जो आदिवासी भाषा और साहित्य को समृद्ध करने के लिए काम कर रही हैं.

सुषमा असुर : आदिम जनजाति की पहली कवयित्री

नेतरहाट के सखुआपानी की रहनेवाली सुषमा असुर आदिम जनजाति की पहली कवयित्री हैं. अब तक इनके कविता संग्रह की तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. एक पुस्तक ‘असुर सिरिंग’ के नाम से है. दो अन्य पुस्तकें भी हैं. एक और कविता संग्रह तथा एक असुर संस्कृति पर भी पुस्तक आनेवाली है. इन्होंने दिल्ली और रांची में प्रतिष्ठित साहित्य सम्मेलनों में मंच साझा किया है. स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की है. अब इग्नू से एमए कर रही हैं. सुषमा 2008-09 से कविता लेखन कर रही हैं. इनकी कविताओं में असुर आदिम जनजाति और संस्कृति का बिंब बहुत खूबसूरती और सहजता के साथ उभरता है. सुषमा नेतरहाट में चलनेवाले असुर रेडियो की टीम को भी लीड कर रही हैं.

असिंता असुर : स्टोरी टेलिंग में महारथ हासिल है

असिंता असुर नेतरहाट के जोभीपाट क्षेत्र की रहनेवाली हैं. ये भी आदिम जनजाति असुर समुदाय से जुड़ी हैं. असिंता असुर महज सातवीं तक पढ़ी हैं. परिस्थितियों ने इन्हें आगे पढ़ने नहीं दिया. पर कहा जाता है न कि जब कुछ करने की इच्छा हो, तो कोई भी परिस्थिति आपको रोक नहीं सकती. असिंता अब असुर रेडियो के साथ जुड़ी हैं. इन्हें स्टोरी टेलिंग में महारथ हासिल है. इनकी स्टोरी में असुर संस्कृति, नेतरहाट व आसपास के जनजीवन, पुरखा कहानियां शामिल होती हैं. इनकी स्टोरी टेलिंग की शैली में सहजता और प्रवाह है, जिसे श्रोता काफी पसंद करते हैं. कई कहानियां ये खुद लिखती हैं. असिंता असुर ‘असुर भाषा’ के संरक्षण के लिए भी काम कर रही हैं.

पुष्पा टेटे : आदिवासी समुदाय के मुद्दों को उठाया

पुष्पा टेटे एक्टिविस्ट, लेखिका और पत्रकार हैं. इन्होंने नेतरहाट आंदोलन और कोइलकारो आंदोलन में हिस्सा लिया है. ये ‘जनहूल नामक’ पत्रिका से जुड़ीं. इन्होंने प्रभात खबर के लिए कई वर्षों तक लिखा. बाद में मासिक पत्रिका ‘झारखंड लहर’ का संपादन किया. ‘झारखंड धारा’ और ‘हम दलित’ पत्रिका में भी लिखती रहीं. ‘ग्राम स्वराज अभियान’ और ‘स्वशासन पत्रिका’ का संपादन किया. फिलहाल पाक्षिक अखबार ‘झारखंड एक्सप्रेस’ की संपादक और प्रकाशक हैं. उनकी पुस्तक ‘आसारी तेरेसा : एक आदिवासी महिला की संघर्षगाथा’ काफी चर्चित रही है. लेखन के जरिये झारखंड के आदिवासी मुद्दों को उठा रही हैं.

Also Read: World Tribal Day 2024: विश्व आदिवासी दिवस पर दीये की रोशनी से जगमग होंगे 100 से अधिक गांव, सम्मानित की जाएंगी प्रतिभाएं

विज्ञापन
Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola