कुवैत में ब्रिटिश कंपनी का मैनेजमेंट संभाल रहे कीर्ति मिंज, तरक्की के बाद भी नहीं छोड़ी अपनी परंपरा

विश्व आदिवासी दिवस 2025
World Tribal Day 2025: वर्ष 1991 में इंजीनियरिंग करके वह बाहर नौकरी करने के लिए चले गये. तब से अब तक करीब 34 वर्षों से वह बाहर हैं, लेकिन आज भी झारखंड और उनका गांव उन्हें खींचता है. दोनों पति-पत्नी जून के समय जैसे ही छुट्टी मिलती है या कोई अवसर होता है, झारखंड चले आते हैं.
World Tribal Day 2025: झारखंड की मिट्टी और आबोहवा परदेस में बैठे लोगों को बरबस अपनी ओर खींचती रहती है. कीर्ति मिंज और उनकी पत्नी कुवैत में 19 सालों से बसे हुए हैं. वहां नौकरी कर रहे हैं. लेकिन उनका दिल झारखंड की मिट्टी, गांव और यहां के अपनों के बीच रचा-बसा है. दोनों हर बरस मौका मिलते ही यहां की मिट्टी की खुशबू महसूस करने चले आते हैं.
मूल रूप से गढ़वा के विश्रामपुर के हैं कीर्ति मिंज
मूल रूप से झारखंड के गढ़वा स्थित विश्रामपुर निवासी कीर्ति मिंज अपनी पत्नी विक्टोरिया के साथ 19 साल से कुवैत में बसे हुए हैं. कुवैत में वह ब्रिटिश कंपनी इकोवर्ट फैसिलिटी मैनेजमेंट में ऑपरेशन व मैनेजमेंट का पूरा काम संभाल रहे हैं. लंबे समय तक इंजीनियरिंग का अनुभव होने से उन पर कंपनी की बड़ी जिम्मेवारी है. इससे पूर्व उन्होंने दूसरी कंपनियों में भी सेवा दी है.
कई छोटे-बड़े शहरों से होते हुए कुवैत पहुंचे कीर्ति
गढ़वा से कुवैत के बीच उनका पड़ाव कई जगहों पर रहा. गढ़वा में पढ़ाई की, फिर रांची में रहने लगे. वर्ष 1991 में एनआइटी जमशेदपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. यहां से गुजरात पहुंचे, फिर दिल्ली. इसके बाद वर्ष 2006 में बड़ा अवसर मिला. तब वह करियर को आगे बढ़ाने के लिए कुवैत पहुंच गये. उनके इस संघर्ष और यात्रा में उनकी पत्नी विक्टोरिया मिंज हमेशा साथ रहीं. वह भी सरकारी नौकरी (एलआइसी) छोड़कर पति के साथ कुवैत चली गयीं.
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34 साल बाद भी कीर्ति को अपनी ओर खींचता है गांव
अभी विक्टोरिया वहां शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं. उनके एकमात्र पुत्र स्पेन में रह रहे हैं. वर्ष 1991 में इंजीनियरिंग करके वह बाहर नौकरी करने के लिए चले गये. तब से अब तक करीब 34 वर्षों से वह बाहर हैं, लेकिन आज भी झारखंड और उनका गांव उन्हें खींचता है. दोनों पति-पत्नी जून के समय जैसे ही छुट्टी मिलती है या कोई अवसर होता है, झारखंड चले आते हैं. कई दिनों तक अपने शुभचिंतकों व रिश्तेदारों के बीच रांची में समय व्यतीत करते हैं, फिर गांव (विश्रामपुर) चले जाते हैं. इस दौरान एक-एक रिश्तेदार और समाज के लोगों के साथ दिन बिताते हैं.
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झारखंड हमेशा अपना सा लगता है : कीर्ति मिंज
कीर्ति मिंज ने बताया कि उन्होंने शुरू से ही नौकरी के क्षेत्र में कुछ करने की सोची थी. इसलिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद नौकरी की तलाश में झारखंड छोड़ दिया, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी झारखंड ही अपना लगता है. यहां आकर अपनापन महसूस होता है. हर कुछ अपना लगता है.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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