रांची़ जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक गर्मी एक बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है. हीट स्ट्रोक के मामले गर्मियों के मौसम में बढ़ते ही जा रहे हैं. इसे लेकर सभी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत है. ये बातें एनएचएम के राज्य महामारी विज्ञानी प्रवीण कर्ण ने कहीं. वे सोमवार को विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सदर अस्पताल में जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ वायु और स्वास्थ्य विषय पर आयोजित परिचर्चा में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि बढ़ती गर्मी जानलेवा होती जा रही है. गर्मी से बचाव के लिए उन्होंने प्रशासन से खुली और ठहराव वाली जगहों पर शेड निर्माण, चौक-चौराहों पर ठंडे पानी व छाछ की व्यवस्था करने की अपील की. साथ ही आम लोगों से कहा कि बढ़ती गर्मी में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और खुद का ध्यान रखें. इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस का थीम है : स्वास्थ्य शुरुआत-आशाजनक भविष्य. कार्यशाला को सिविल सर्जन डाॅ प्रभात कुमार, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ओएसडी संजय श्रीवास्तव, अंकिता ज्योति ने भी विचार दिये.
एसी का इस्तेमाल कारगर उपाय नहीं
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक प्रमुख अभिषेक आनंद ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण बढ़ने में मानव का बहुत बड़ा योगदान है. जलवायु परिवर्तन का बहुत बड़ा कारण विकास और तेजी से शहरीकरण होना है. आज दिन और रात के तापमान में काफी अंतर आ गया है. रात में भी गर्मी बढ़ रही है. गर्मी से बचने के लिए एसी का प्रयोग करना कोई कारगर उपाय नही है, बल्कि हमें प्राकृतिक चीजों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

