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महिला ने कोर्ट में कहा : मेरे साथ नहीं हुआ था दुष्कर्म, पुलिस ने मेरे अंगूठे का निशान लेकर दर्ज किया केस

Updated at : 21 Jun 2024 1:00 AM (IST)
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महिला ने कोर्ट में कहा : मेरे साथ नहीं हुआ था दुष्कर्म, पुलिस ने मेरे अंगूठे का निशान लेकर दर्ज किया केस

न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी युवक को केस में बरी किया

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अमन तिवारी, रांची. डोरंडा थाना की पुलिस ने एक महिला के साथ दुष्कर्म के आरोप में 18 फरवरी 2015 को केस दर्ज कर कुसई कॉलोनी निवासी मुन्ना गिरि उर्फ यादव को जेल भेज दिया था. इसके बाद अभियुक्त पर आरोप सही पाते चार्जशीट दायर कर दिया था. अब उसी महिला ने कोर्ट को जानकारी दी है कि उसके साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था. महिला ने कोर्ट को बताया कि वह अनपढ़ है. पुलिस ने एक सादे कागज पर उसके अंगूठे का निशान लेकर केस कर दिया था. प्राथमिकी में जिस तारीख (17 फरवरी 2015) को दुष्कर्म की घटना बतायी जा रही है, उस दिन महिला अपने पति और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर में मौजूद थी. केस दर्ज होने के दूसरे दिन पड़ोसियों से महिला को जानकारी मिली कि पुलिस ने मुन्ना को जेल भेज दिया है. केस में किसी अन्य की गवाही नहीं होने और महिला के बयान के आधार पर न्यायालय ने मुन्ना को दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया है. बता दें कि मुन्ना 19 फरवरी 2015 जेल गया था और चार अप्रैल 2015 को जमानत पर जेल से बाहर निकला था. हैरान करनेवाला मामला, पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में : उल्लेखनीय है कि अब तक दुष्कर्म के मामलों में अभियुक्त न्यायालय से बरी होते रहे हैं. वर्ष 2022 में राज्य में दुष्कर्म के 138 मामलों में सजा हुई थी, जबकि 445 मामलों में अभियुक्त बरी गये थे. सजा पानेवाले अभियुक्तों की संख्या 172 थी, जबकि 518 अभियुक्त बरी हो गये थे. इनमें से 369 अभियुक्त को साक्ष्य के अभाव में बरी हुए थे. वहीं, 41 अभियुक्त पक्षद्रोही गवाही(होस्टाइल) और 53 अभियुक्त समझौता के आधार पर बरी किये गये थे. इक्का-दुक्का मामले ही ऐसे होते हैं, जिसमें पीड़िता दुष्कर्म की घटना से ही इनकार कर दे और अभियुक्त बरी हो जाये. उक्त मामले में भी पीड़िता ने सीधे तौर पर कहा है कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ ही नहीं था. पुलिस ने सादे कागज पर उसके अंगूठे का निशान लेकर केस दर्ज कर लिया था. केस में कब-कब क्या कार्रवाई हुई : 18 फरवरी 2015 : डोरंडा थाना की पुलिस ने दुष्कर्म की घटना को केस दर्ज किया. 31 मार्च 2015 : आरोप सही पाते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चार्जशीट किया. 31 मार्च 2022 : अभियुक्त ने आरोप अस्वीकार करते हुए ट्रायल का अनुरोध किया. 31 मार्च 2022 : केस के अभियुक्त के खिलाफ आरोप गठित किया गया. 16 अप्रैल 2022 : पहले गवाह को उपस्थित होने के लिए जमानती वारंटी जारी हुआ. 15 फरवरी 2023 : गवाही के लिए गैरजमानती वारंट जारी किया गया. 11 अगस्त 2023 : मामले में न्यायालय ने एसएसपी को पत्र लिखा.

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