3 महीने में वर्षा-वज्रपात से देश में 1626 लोगों की मौत, 431 मौतें सिर्फ झारखंड में

झारखंड में वर्षा-वज्रपात, सर्पदंश और बाढ़ से 431 लोगों की मौत. फोटो : प्रभात खबर
Weather Disaster: देश भर में मई से 31 जुलाई के बीच तीन महीने में वर्षा-वज्रपात से 1626 लोगों की मौत हुई है. इनमें से 431 लोगों की मौत सिर्फ झारखंड में हुई है. आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, झारखंड में 180 लोगों की मौत बिजली गिरने से हुई जबकि 161 लोगों की मौत डूबने से हुई है. 80 लोग सर्पदंश का शिकार हुए, तो 9 लोग वर्षाजनित हादसों में और 1 व्यक्ति की मौत बाढ़ में हुई है.
Weather Disaster: वर्षा और वज्रपात से पिछले 3 महीने (मई से 31 जुलाई 2025) के बीच इस साल देश भर में 1,626 लोगों की मौत हुई है. इसमें 25 फीसदी से अधिक मौतें झारखंड में हुईं हैं. महज तीन महने में वज्रपात, डूबने समेत विभिन्न आपदाओं में 431 लोगों की मौत हो गयी. 180 लोगों की मौत बिजली गिरने से हुई और 161 लोगों की मौत डूबने से.
झारखंड में 80 लोगों की मौत सर्पदंश से
झारखंड के आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि इनमें से 80 लोगों की मौत सर्पदंश से, 9 लोगों की मौत भारी बारिश से और एक व्यक्ति की मौत बाढ़ से हुई है. उन्होंने बताया कि 17 जून को मानसून ने झारखंड में दस्तक दी थी. उसके बाद से लगातार हुई वर्षा में जान-माल को भारी नुकसान हुआ है.
52 हजार से अधिक पशु मरे, 1.58 लाख हेक्टेयर फसल को नुकसान
उधर, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने सरकार ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि वर्ष 2025-26 में 31 जुलाई तक देश भर में वर्षा और वज्रपात से 1,626 लोगों की मौत हुई है. मंत्री ने बताया कि इस अवधि के दौरान जल-मौसम संबंधी आपदाओं के कारण 52,367 पशुओं की भी जान चली गयी. 1,57,817.6 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है.
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10 राज्यों के 50 जिलों को वज्रपात से सुरक्षित करने पर खर्च होंगे 186.78 करोड़ रुपए
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने झारखंड, बहार समेत 10 राज्यों के 50 जिलों के लिए 186.78 करोड़ रुपए के कुल वित्तीय परिव्यय वाली ‘वज्रपात सुरक्षा शमन परियोजना’ को मंजूरी दी है. इसका मकसद बिजली गिरने से होने वाली मौतों, पशुधन की हानि और बुनियादी ढांचे के नुकसान को कम करना है.
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Weather Disaster: देश में 112 सेंसर वाला आकाशीय बिजली प्रणाली स्थापित किया
उन्होंने कहा कि वज्रपात सुरक्षा शमन परियोजना के लिए आंध्रप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के जिलों को चुना गया है. उन्होंने कहा कि भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे ने बिजली गिरने की घटनाओं का सटीक पता लगाने के लिए देश भर में फैले 112 सेंसर वाला आकाशीय बिजली प्रणाली स्थापित किया है.
एक सेंसर का कवरेज दायरा 200-250 किमी
नित्यानंद राय ने राज्यसभा को बताया कि प्रत्येक सेंसर के कवरेज का दायरा 200 से 250 किलोमीटर हो सकता है. इसलिए अब पूरा देश इस नेटवर्क के अंतर्गत आता है.
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By Mithilesh Jha
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