Research news of TRI : तस्वीरों में जिंदा होंगे गुमनाम आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी

Updated:
विज्ञापन

जल्द ही झारखंड के गुमनाम नायक तस्वीरों में जिंदा होंगे. डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान ऐसे ही शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों पर शोध करा रहा है. उस शोध के आधार पर उन शहीदों और गुमनाम नायकों की तस्वीरें बनायी जायेंगी, जिससे यह पता लग सकेगा कि वे स्वतंत्रता सेनानी कैसे दिखते थे.

विज्ञापन

प्रवीण मुंडा (रांची). जब ‘धरती आबा बिरसा मुंडा’ को अंग्रेजों ने गिरफ्तार किया था, उस समय की एक तस्वीर उपलब्ध है. इससे पता लगता है कि धरती आबा कैसे दिखते थे. हूल क्रांति के नायक सिदो-कान्हू के बारे में भी काफी जानकारी उपलब्ध है. जिनके आधार पर उनकी तस्वीरें और मूर्तियां बनायी गयी हैं. पर झारखंड के ऐसे गुमनाम और अचर्चित नायकों की एक लंबी फेहरिस्त है, जिनके बारे में लोगों को कोई जानकारी नहीं है. उनकी कोई तस्वीर या विवरण भी उपलब्ध नहीं है, ताकि यह पता लगे कि वे कैसे दिखते थे? उनका वास्तविक चेहरा कैसा था?

जनजातीय शोध संस्थान कर रहा शोध

मिसाल के तौर पर हाथीराम मुंडा, जिन्हें अंग्रेजों ने जिंदा दफन कर दिया था. जिस दिन उन्हें दफन किया गया था, उसी दिन उनके चचेरे भाई हाड़ी मुंडा को भी गोली मार दी गयी थी. इनके अलावा शहीद होपन मांझी, शहीद बैरू मांझी, अर्जुन मांझी जैसे नाम आज भी गुमनाम हैं. इन स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के बारे में बहुत ज्यादा विवरण उपलब्ध नहीं है. पर जल्द ही ये गुमनाम नायक तस्वीरों में जिंदा होंगे. डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान ऐसे ही शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों पर शोध करा रहा है. उस शोध के आधार पर उन शहीदों और गुमनाम नायकों की तस्वीरें बनायी जायेंगी, जिससे यह पता लग सकेगा कि वे स्वतंत्रता सेनानी कैसे दिखते थे.

पुराने अभिलेखों में भी तलाशी जा रहीं जानकारियां

संस्थान की उपनिदेशक मोनिका टूटी से मिली जानकारी के अनुसार, इस शोध अध्ययन के लिए स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों और उनके गांव के लोगों से मिलकर उनके व्यक्तित्व के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने का प्रयास किया जायेगा. इसके अलावा पुराने अभिलेखों में भी उनके बारे में जानकारियां तलाशी जा रही हैं. इस शोध अध्ययन में आदिवासी चित्रकारों साहेबराम टुडू, महावीर तिग्गा व अन्य को भी शामिल किया जा रहा है. शोध से मिली जानकारियों के आधार पर स्वतंत्रता सेनानियों का पोट्रेट बनाया जायेगा. कोशिश की जा रही है कि जो पोट्रेट बने, वे वास्तविकता के ज्यादा से ज्यादा करीब हों. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद बाद लोगों को झारखंड के उन आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों का वास्तविक चेहरा देखने का मौका मिलेगा, जो अब तक गुमनाम हैं.

आपके शहर में

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola