रांची में ट्रैफिक जाम बना मौत का कारण, एंबुलेंस फंसने से दो दिन की नवजात ने मां की गोद में तोड़ा दम

Published by :Priya Gupta
Published at :26 Apr 2026 8:23 AM (IST)
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Ranchi News

रांची में ट्रैफिक जाम

Ranchi News: रांची में ट्रैफिक जाम की खराब स्थिति ने एक नवजात की जान ले ली. बुंडू से रिम्स लाई जा रही दो दिन की बच्ची की एंबुलेंस ट्रैफिक जाम में फंस गई, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल सका और उसकी मौत हो गई. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से बिपिन सिंह की रिपोर्ट 

Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची के ट्रैफिक जाम ने शनिवार को एक नवजात की जान ले ली. गुरुवार की शाम पांच बजे सोनाहातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जन्मी बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर उसे शनिवार को बेहतर इलाज के लिए डायल-108 एंबुलेंस (JH01FL1458) से रिम्स लाया जा रहा था. बुंडू से आ रही एंबुलेंस कांटाटोली चौक से सामलौंग के बीच लगे भीषण जाम में फंस गई. करीब घंटे भर जद्दोजहद करने के बाद एंबुलेंस चालक नवजात को लेकर रिम्स पहुंचा. मां रेणुका अपनी बच्ची को सीने से चिपकाए डॉक्टर के पास पहुंची, लेकिन जांच के बाद चिकित्सकों ने अफसोस जताते हुए कहा आपने अस्पताल पहुंचने में देर कर दी. इतना सुनते ही मां की आंखों से आंसू बहने लगे. बच्ची को खोने के सदमे से वह खामोश हो गई. वहीं, नवजात के पिता वीणाधर महतो ने कहा कि उन्हें किसी से शिकायत नहीं है. सिर्फ इतना चाहता हूं कि जाम की वजह से किसी और की जान न जाए.

काम नहीं आया एंबुलेंस ड्राइवर का प्रयास

जाम के बीच एंबुलेंस चालक पुरेंद्र नाथ महतो ने हर मुमकिन कोशिश की, जिससे एंबुलेंस को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सके. लेकिन, वह व्यवस्था के आगे पूरी तरह से लाचार था. एंबुलेंस में इमरजेंसी मैनेजमेंट टेक्नीशियन स्टाफ यशोदा कुमारी भी थी. वहीं, केबिन में मां रेणुका अपनी बच्ची को कलेजे से चिपकाए बैठी थी. सायरन बजाती एंबुलेंस को जाम में फंसा देख आमलोग उसे आगे रास्ता दिलाने का प्रयास करते दिखे. लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था.

जन्म के बाद से ही बच्ची को सांस लेने में हो रही थी परेशानी

सालूकडीह ईचागढ़ के रहनेवाले वीणाधर महतो की पत्नी रेणुका ने गुरुवार की शाम पांच बजे सोनाहातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्ची को जन्म दिया था. जन्म के बाद से नवजात को हाई फीवर था और सांस लेने में परेशानी थी. दो दिनों तक उपचार करने के बाद डॉक्टरों ने उसे रिम्स रेफर कर दिया. यह रेणुका का पहला बच्चा था.

नवजात की मौत के गुनहगार

1. बस स्टैंड के मुहाने पर बस व ऑटो का जमावड़ा

कांटाटोली चौक से कुछ दूरी (कांटाटोली-जमशेदपुर रूट) पर बस स्टैंड का दूसरा गेट है. इस गेट से रुक-रुक कर धीमी रफ्तार में निकलने वाली बसों ने पूरा रास्ता ब्लॉक कर रखा था और बस के खलासी-कंडक्टर यात्रियों को बस में बैठाने के लिए आवाज लगा रहे थे. यहीं पर ऑटो वाले भी सवारी उतारने और चढ़ाने के लिए रुक रहे थे, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई. धीरे-धीरे जाम भीषण होता चला गया.

2. भीषण जाम के बावजूद ट्रैफिक पुलिस नदारद

बुंडू से आ रही एंबुलेंस लोआडीह होते हुए जैसे ही मौलाना आजाद चौक के पास पहुंची, जाम में फंस गई. एंबुलेंस चालक रास्ता तलाशते और जल्द निकलने के प्रयास में दूसरी तरफ की खाली सड़क पर चली गई. करीब दो सौ मीटर आगे पहुंचने के बाद एंबुलेंस पेट्रोल पंप के पास आकर रुक गई, क्योंकि यहां सड़क पर ऑटो और बस के खड़ी रहने कारण एंबुलेंस का आगे बढ़ पाना मुश्किल हो रहा था. लेकिन, एंबुलेंस को रास्ता देने में मदद करने के लिए ट्रैफिक पुलिस का कोई जवान मौजूद नजर नहीं आ रहा था.

पिता का दर्द- “मेरी बच्ची की जान जाम ने ली”

नवजात के पिता वीणाधर महतो ने कहा कि आज तक कांटाटोली में इतना जाम नहीं देखा था, शायद यह जाम मेरी बच्ची की जान लेने की लिए ही लगा था. रिम्स इमरजेंसी में टोकन कटवाने के लिए गए थे, पर्ची कटवा भी नहीं पाए कि डॉक्टर मैडम ने तुरंत ऑक्सीजन दिया. पेट और गला के पास दबाकर देखा और कहा कि आपलोगों ने बच्ची को लाने में थोड़ी देर कर दी, वरना बच्ची की जान बचाई जा सकती थी.

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लेखक के बारे में

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प्रिया गुप्ता प्रभात खबर के लाइफस्टाइल बीट पर 1 साल से काम कर रही हैं. यहां वे हेल्थ, फैशन और भी ट्रेंड से जुड़ी आर्टिकल लिखती हैं. ये हर लेख को दिल से लिखती है, जो पाठकों को सिर्फ जानकारी नहीं, एक एहसास पहुंचा सकें.

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