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Ranchi news : अब तक संताल परगना के 20 विधायक मंत्री और तीन बने मुख्यमंत्री

Updated at : 03 Nov 2024 10:48 PM (IST)
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Birsa Munda

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पंडित विनोदानंद झा, शिबू सोरेन व हेमंत सीएम रहे. सत्ता के केंद्र बिंदु में हमेशा से रहता आया है संताल परगना का क्षेत्र.

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संजीत मंडल, देवघर. संताल परगना की भूमि राजनीतिक रूप से काफी उर्वर रही है. कई मौके ऐसे आये हैं, जब झारखंड में सरकार बनाने की कुंजी संताल परगना के पास रही है. यही कारण है झारखंड में संताल परगना प्रमंडल का अलग महत्व है. चाहे जिस पार्टी की सरकार रही हो, उनका मुख्य फोकस संताल परगना रहता है. यह बात और है कि एकीकृत बिहार में संताल परगना काफी उपेक्षित रहा. दूसरी ओर अब तक सत्ता के केंद्र बिंदु में संताल परगना हमेशा रहता आया है, चाहे केंद्र या राज्य की सरकार हो. इसकी महत्ता इसी बात से आंक सकते हैं कि संताल परगना ने एकीकृत बिहार में तो मुख्यमंत्री दिया ही, झारखंड बनने के बाद भी इस क्षेत्र से दो-दो मुख्यमंत्री रहे. सीएम बननेवालों में पंडित विनोदानंद झा, शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन शामिल हैं. वहीं, संताल परगना के 20 विधायक अब तक मंत्री पद संभाल चुके हैं.

एकीकृत बिहार में देवघर के पंडित विनोदानंद झा बने सीएम : एकीकृत बिहार में देवघर के रहनेवाले पंडित विनोदानंद झा मुख्यमंत्री बने. वह फरवरी 1961 से अक्टूबर 1963 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे. वहीं, झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री बने. वर्तमान में इसी इलाके से हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री हैं. यानी तीन-तीन मुख्यमंत्री संताल परगना ने अब तक दिये हैं.

राज्य सरकार में मंत्री बननेवालों की भी है लंबी फेहरिस्त

वहीं राज्य सरकार में मंत्री बनने की बात करें, तो इसकी भी फेहरिस्त लंबी है. आंकड़ों के मुताबिक, इस इलाके से एकीकृत बिहार में कृष्णानंद झा-मधुपुर, फुरकान अंसारी-जामताड़ा और अवध बिहारी सिंह-महागामा मंत्री रहे थे. वहीं झारखंड सरकार में 17 विधायक इस क्षेत्र के मंत्री बने हैं. इनमें कई विधायक तो कई सरकारों में मंत्री रहे. जैसे नलिन सोरेन-शिकारीपाड़ा, हाजी हुसैन अंसारी-मधुपुर, आलमगीर आलम-पाकुड़ और प्रदीप यादव-पोड़ैयाहाट सहित अन्य विधायक एक से अधिक बार मंत्री रहे हैं. जबकि सारठ के विधायक शशांक शेखर भोक्ता और नाला के विधायक रविंद्र महतो स्पीकर रहे हैं.

18 विधायक बनते हैं सरकार की सत्ता की धुरी

संताल परगना के छह जिले में 18 विधानसभा सीटे हैं. यहां सात एसटी और एक एससी रिजर्व सीट है. शेष 10 विधानसभा सीटें सामान्य हैं. जब भी चुनाव हुए हैं और जिसकी भी सरकार बनी है, सत्ता की धुरी संताल परगना के 18 विधायक ही बनते हैं. रिजर्व सीट-एसटी : दुमका, जामा, शिकारीपाड़ा, बोरियो, बरहेट, महेशपुर और लिट्टीपाड़ा, एससी सीट : देवघर और सामान्य सीट : मधुपुर, सारठ, जरमुंडी, गोड्डा, पोड़ैयाहाट, महागामा, पाकुड़, राजमहल, नाला और जामताड़ा.

इन्हें मिला सीएम पद

पंडित विनोदानंद झा : देवघर/राजमहल

शिबू सोरेन-जामताड़ाहेमंत सोरेन-बरहेट

इन्हें मिला मंत्री पद

केएन झा -मधुपुर

फुरकान अंसारी-जामताड़ाअवध बिहारी सिंह-महागामा

स्टीफन मरांडी-महेशपुरनलिन सोरेन-शिकारीपाड़ा

हाजी हुसैन अंसारी-मधुपुरशशांक शेखर भोक्ता-सारठ

रवींद्र महतो-नालाआलमगीर आलम-पाकुड़

प्रदीप यादव-पोड़ैयाहाटडॉ लुइस मरांडी-दुमका

राज पलिवार-मधुपुरसुरेश पासवान-देवघर

बादल पत्रलेख-जरमुंडीरणधीर कुमार सिंह-सारठ

डॉ इरफान अंसारी-जामताड़ाहफीजुल हसन-मधुपुर

दीपिका पांडेय सिंह-महागामाबसंत सोरेन-दुमका

हरिनारायण राय-जरमुंडी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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