Watch Video : पाइप एंड बैग मेथड से जीव वैज्ञानिक विवेकानंद ने रसेल वाइपर को छकाया

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 18 Sep 2025 8:29 PM

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सांप को पकड़ते विवेक ( Photo: PTI)

Watch Video : जीव वैज्ञानिक विवेकानंद ने पाइप एंड बैग मेथड से रसेल वाइपर को सुरक्षित पकड़ा. इसका वीडियो सामने आया है. पाइप और बैग मेथड का उपयोग करने से सांप के अलावा इंसान भी भी सुरक्षित रहता है. देखें वीडियो और समझें मेथड.

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Watch Video : रांची के ओरमांझी में कलकत्ता पब्लिक स्कूल के सामने, बैंक ऑफ इंडिया के पास बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य चल रहा था. मजदूर टाइल्स हटा रहे थे, तभी एक सांप टाइल्स के बीच की जगह में जाकर छिप गया. यह रसेल वाइपर था जिसे जीव वैज्ञानिक विवेकानंद कुमार ने पकड़ा और जंगल में छोड़ दिया. विवेकानंद ने बताया, ‘’मुझे एक कॉल आया और बताया गया कि वहां एक कोबरा सांप है. मैंने व्हाट्सऐप पर उसकी फोटो मंगवाई और देखा तो पता चला कि वह रसेल वाइपर है. मैं वहां गया और पाइप एंड बैग मेथड का इस्तेमाल करके सांप को पकड़ लिया.

पाइप एंड बैग मेथड क्या है?

पाइप एंड बैग मेथड एक ऐसा तरीका है जिसमें एक पाइप के एक छोर पर कपड़े का बैग बांध दिया जाता है और उसे किसी दीवार या सांप के भागने की दिशा में रखा जाता है. इसके बाद सां को स्नेक हुक या डंडे की मदद से आगे की ओर भगाया जाता है और फिर सांप आसानी से बैग में घुस जाता है. यह एक बहुत ही सुरक्षित तरीका है. कई बार स्नेक रेस्क्यू के दौरान लोगों को सांप के काटने के मामले सामने आते हैं, जो ज़्यादातर उनकी गलत तरीके से पकड़ने के कारण होते हैं. पाइप और बैग मेथड का उपयोग करने से सांप भी सुरक्षित रहता है और इंसान भी.

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लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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