Shibu Soren Political Career: समाज सुधारक से सांसद, विधायक, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री, ऐसी रही शिबू सोरेन की जीवन यात्रा

शिबू सोरेन
Shibu Soren Life: हजारीबाग के नेमरा गांव (अब रामढ़ जिले में) में जन्मे शिबू सोरेन छोटी उम्र में ही समाज सुधारक की भूमिका में आ गये थे. उनके पिता की महाजनों ने हत्या कर दी, तो शिबू सोरेन ने अपनी पढ़ाई छोड़कर आदिवासियों को एकजुट करना शुरू किया. उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक करने लगे. महाजनों के खिलाफ धनकटनी आंदोलन शुरू किया. देखते ही देखते उन्होंने अलग झारखंड राज्य के लिए आंदोलन शुरू कर दिया. समाज सुधारक से वह राजनेता बन गये. सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री और झारखंड में 3 बार मुख्यमंत्री बने.
Shibu Soren News know Political Career: शिबू सोरेन ने समाज सुधारक, सामाजिक कार्यकर्ता से राजनेता तक का सफर तय किया. अलग झारखंड राज्य के लिए उन्होंने कई कुर्बानियां दीं. यही वजह है कि झारखंड के सभी दलों के लोग उनकी इज्जत करते हैं. उनके कर्मों का ही परिणाम रहा कि दिशोम गुरु ने लोकसभा के चुनावों में जीत दर्ज की, तो उच्च सदन राज्यसभा के भी सदस्य बने. 2-2 बार केंद्रीय मंत्री बने. 3 बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने. हालांकि, न केंद्रीय मंत्री के रूप में वह कभी अपना कार्यकाल पूरा कर पाये, न मुख्यमंत्री के रूप में. हर बार उन्हें कार्यकाल के बीच में इस्तीफा देना पड़ा. कभी जेल जाने की वजह से, तो कभी उपचुनाव में हार की वजह से. 11 जनवरी 1944 को जन्मे शिबू सोरेन (Shibu Soren)से कई विवादों भी जुड़े. उन पर कई गंभीर आरोप भी लगे. बावजूद इसके वह राज्य के सबसे बड़े और सर्वमान्य नेता बने रहे. उनकी पूरी राजनीतिक यात्रा को एक नजर में यहां देखें.
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Shibu Soren की राजनीतिक यात्रा : एक नजर में
- 1973 में झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन किया
- 1980 में लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए
- 1986 में झामुमो के महासिचव बने
- 1989 में लोकसभा के लिए दूसरी बार चुने गये
- 1991 में तीसरी बार लोकसभा के लिए निर्वाचित
- 1996 में चौथी बार लोकसभा के सदस्य बने
- 8 जुलाई 1998 से 18 जुलाई 2001 तक राज्यसभा के सदस्य रहे
- 10 अप्रैल 2002 से 2 जून 2002 तक राज्यसभा के सदस्य रहे
- 2002 में पांचवीं बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए
- मई 2004 में छठी बार लोकसभा के सदस्य बने
- मई 2004 से 10 मार्च 2005 तक केंद्र में कोयला मंत्री रहे
- जुलाई 2004 में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया
- 2 मार्च 2005 से 11 मार्च 2005 तक झारखंड के मुख्यमंत्री रहे
- 29 जनवरी 2006 से 28 नवंबर 2006 तक केंद्र में कोयला मंत्री बने
- 26 नवंबर 2006 को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देना पड़ा
- 2009 में 15वीं लोकसभा में 7वीं बार सांसद चुने गये
- 31 अगस्त 2009 को कोयला और स्टील की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य बने
- 23 सितंबर 2009 को वेतन और भत्तों की संयुक्त समिति के सदस्य बने
- मई 2014 में आठवीं बार लोकसभा के लिए चुने गये
- 7 अक्टूबर 2014 में खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों की स्थायी समिति के सदस्य बने
- स्टील मंत्रालय की सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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