कुपोषण के मामले में झारखंड दूसरे नंबर पर, 5 साल से कम उम्र के 43.26 फीसदी बच्चे ठिगने

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झारखंड में बड़ी संख्या में बच्चे हैं कुपोषित.

Malnutrition in Jharkhand: कुपोषण के मामले में झारखंड देश में दूसरे नंबर पर है. यहां 5 साल से कम उम्र के 43.26 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं. इन बच्चों की या तो लंबाई कम है या लंबाई की तुलना में वे बहुत दुबले हैं. महिला एवं बाल विकास मंत्री ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी है. झारखंड में पोषण योजना के कितने लाभुक हैं और कितने आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं, उसकी सारी डिटेल यहां पढ़ें.

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Malnutrition in Jharkhand: कुपोषण के मामले में झारखंड देश में दूसरे नंबर पर है. प्रदेश में 6 साल से कम उम्र के 43.26 फीसदी बच्चे ठिगने हैं. सरकारी आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है. केंद्र सरकार ने खुद माना है कि देश में 37 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. झारखंड में ऐसे बच्चों की संख्या 43.26 फीसदी है.

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37.97% बच्चों की लंबाई कम, 15.93% का वजन कम

केंद्र सरकार के पोषण ट्रैकर के तहत रजिस्टर्ड 5 साल से कम उम्र के 37.97 प्रतिशत बच्चों की लंबाई कम है, जबकि 15.93 प्रतिशत बच्चों का वजन कम है. 5.46 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो अत्यधिक दुबले पतले हैं. राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने यह जानकारी दी है.

उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे झारखंड में

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने बताया है कि ‘वेस्टेड’ वह स्थिति होती है, जब कोई व्यक्ति, विशेष रूप से बच्चा, उसकी लंबाई की तुलना में अत्यधिक दुबला होता है. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में ठिगने बच्चों की दर सबसे अधिक 48.83 प्रतिशत है. इसके बाद झारखंड (43.26 प्रतिशत), बिहार (42.68 प्रतिशत) और मध्यप्रदेश (42.09 प्रतिशत) का स्थान है.

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6 वर्ष की उम्र के 8.61 करोड़ बच्चे पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत

सावित्री ठाकुर ने सदन को बताया कि जून 2025 तक 6 वर्ष तक की उम्र के करीब 8.61 करोड़ बच्चे पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत हैं, जो पिछले वर्ष के 8.91 करोड़ के मुकाबले थोड़ी गिरावट को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि लगभग 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है, जहां आधुनिक बुनियादी ढांचे और डिजिटल लर्निंग टूल्स उपलब्ध कराये जायेंगे.

Malnutrition in Jharkhand: 88716 आंनवाड़ी केंद्रों के उन्नयन को मंजूरी

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने बताया कि अब तक 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 88,716 मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों के उन्नयन को मंजूरी दी जा चुकी है. देश में 14,01,513 आंगनवाड़ी केंद्र हैं. इसके लाभुकों की संख्या 9,99,57,012 है. 0 से 5 साल तक के 6 फीसदी बच्चे मोटापा के शिकार हैं.

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झारखंड के 24 जिलों में चल रहे 224 प्रोजेक्ट

झारखंड के 24 जिलों में महिलाओं एवं बच्चों के लिए 1,356 सेक्टर में 224 प्रोजेक्ट चल रहे हैं. राज्य में 38,756 आंगनवाड़ी सेंटर चल रहे हैं, जिसमें 37,800 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता काम कर रहीं हैं. झारखंड में 32,74,633 लाभुकों को आंगनवाड़ी का लाभ मिल रहा है.

बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिल रहा योजना का लाभ

झारखंड में पोषण योजना का लाभ लेने वाले बच्चों (0-6 माह) की संख्या 1,08,153 है. 6 माह से 3 साल तक के लाभुक बच्चों की संख्या 12,05,381 है. 3 साल से 6 साल के लाभुकों की संख्या 14,38,192 है. झारखंड की 1,94,965 गर्भवती महिलाओं को भी इस योजना का लाभ मिल रहा है.

आधार सीडिंग में बेहतर, हेल्थ कार्ड बनाने में फिसड्डी

कुल लाभुकों में 1,23,428 महिलाएं स्तनपान कराती हैं. राज्य में 2,04,514 किशोरियों को भी पोषण योजना का लाभ मिलता है. कुल लाभुकों में 31,77,620 यानी 97.04 प्रतिशत लाभुकों के रिकॉर्ड आधार से जुड़े हैं. 2,540 यानी 0.08 प्रतिशत लोगों का ही अब तक हेल्थ कार्ड बन पाया है.

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