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कुपोषण के मामले में झारखंड दूसरे नंबर पर, 5 साल से कम उम्र के 43.26 फीसदी बच्चे ठिगने

Updated at : 23 Jul 2025 8:13 PM (IST)
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Malnutrition in Jharkhand

झारखंड में बड़ी संख्या में बच्चे हैं कुपोषित.

Malnutrition in Jharkhand: कुपोषण के मामले में झारखंड देश में दूसरे नंबर पर है. यहां 5 साल से कम उम्र के 43.26 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं. इन बच्चों की या तो लंबाई कम है या लंबाई की तुलना में वे बहुत दुबले हैं. महिला एवं बाल विकास मंत्री ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी है. झारखंड में पोषण योजना के कितने लाभुक हैं और कितने आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं, उसकी सारी डिटेल यहां पढ़ें.

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Malnutrition in Jharkhand: कुपोषण के मामले में झारखंड देश में दूसरे नंबर पर है. प्रदेश में 6 साल से कम उम्र के 43.26 फीसदी बच्चे ठिगने हैं. सरकारी आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है. केंद्र सरकार ने खुद माना है कि देश में 37 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. झारखंड में ऐसे बच्चों की संख्या 43.26 फीसदी है.

37.97% बच्चों की लंबाई कम, 15.93% का वजन कम

केंद्र सरकार के पोषण ट्रैकर के तहत रजिस्टर्ड 5 साल से कम उम्र के 37.97 प्रतिशत बच्चों की लंबाई कम है, जबकि 15.93 प्रतिशत बच्चों का वजन कम है. 5.46 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो अत्यधिक दुबले पतले हैं. राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने यह जानकारी दी है.

उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे झारखंड में

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने बताया है कि ‘वेस्टेड’ वह स्थिति होती है, जब कोई व्यक्ति, विशेष रूप से बच्चा, उसकी लंबाई की तुलना में अत्यधिक दुबला होता है. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में ठिगने बच्चों की दर सबसे अधिक 48.83 प्रतिशत है. इसके बाद झारखंड (43.26 प्रतिशत), बिहार (42.68 प्रतिशत) और मध्यप्रदेश (42.09 प्रतिशत) का स्थान है.

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6 वर्ष की उम्र के 8.61 करोड़ बच्चे पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत

सावित्री ठाकुर ने सदन को बताया कि जून 2025 तक 6 वर्ष तक की उम्र के करीब 8.61 करोड़ बच्चे पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत हैं, जो पिछले वर्ष के 8.91 करोड़ के मुकाबले थोड़ी गिरावट को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि लगभग 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है, जहां आधुनिक बुनियादी ढांचे और डिजिटल लर्निंग टूल्स उपलब्ध कराये जायेंगे.

Malnutrition in Jharkhand: 88716 आंनवाड़ी केंद्रों के उन्नयन को मंजूरी

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने बताया कि अब तक 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 88,716 मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों के उन्नयन को मंजूरी दी जा चुकी है. देश में 14,01,513 आंगनवाड़ी केंद्र हैं. इसके लाभुकों की संख्या 9,99,57,012 है. 0 से 5 साल तक के 6 फीसदी बच्चे मोटापा के शिकार हैं.

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झारखंड के 24 जिलों में चल रहे 224 प्रोजेक्ट

झारखंड के 24 जिलों में महिलाओं एवं बच्चों के लिए 1,356 सेक्टर में 224 प्रोजेक्ट चल रहे हैं. राज्य में 38,756 आंगनवाड़ी सेंटर चल रहे हैं, जिसमें 37,800 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता काम कर रहीं हैं. झारखंड में 32,74,633 लाभुकों को आंगनवाड़ी का लाभ मिल रहा है.

बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिल रहा योजना का लाभ

झारखंड में पोषण योजना का लाभ लेने वाले बच्चों (0-6 माह) की संख्या 1,08,153 है. 6 माह से 3 साल तक के लाभुक बच्चों की संख्या 12,05,381 है. 3 साल से 6 साल के लाभुकों की संख्या 14,38,192 है. झारखंड की 1,94,965 गर्भवती महिलाओं को भी इस योजना का लाभ मिल रहा है.

आधार सीडिंग में बेहतर, हेल्थ कार्ड बनाने में फिसड्डी

कुल लाभुकों में 1,23,428 महिलाएं स्तनपान कराती हैं. राज्य में 2,04,514 किशोरियों को भी पोषण योजना का लाभ मिलता है. कुल लाभुकों में 31,77,620 यानी 97.04 प्रतिशत लाभुकों के रिकॉर्ड आधार से जुड़े हैं. 2,540 यानी 0.08 प्रतिशत लोगों का ही अब तक हेल्थ कार्ड बन पाया है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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