IRCTC मामले में लालू-राबड़ी और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने पर फैसला 5 अगस्त को

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लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत कई लोगों पर 5 अगस्त को आ सकता है फैसला. फोटो : प्रभात खबर

IRCTC Case Decision: आईआरसीटीसी के 2 होटलों से जुड़ी कथित अनियमितता मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी प्रसाद समेत अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय करने पर फैसला अब 5 अगस्त को आयेगा. दिल्ली की एक अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला 5 अगस्त तक के लिए सुरक्षित रख लिया.

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IRCTC Case: भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम लिमिटेड (आईआरसीटीसी) में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का फैसला 5 अगस्त तक के लिए टाल दिया. आरोपों पर 29 मई को बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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केस में अधिकतम 7 साल तक जेल की सजा का है प्रावधान

लालू प्रसाद यादव उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव ने इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उन पर लगाये गये भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों का खंडन किया है. इन आरोपों में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी भी शामिल है. इस केस में आरोपियों को अधिकतम 7 साल की जेल की सजा का प्रावधान है. लालू परिवार के तीनों प्रमुख सदस्यों ने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में दावा किया है कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं.

IRCTC Case: यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री थे लालू प्रसाद

कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की पहली सरकार में लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे. मंत्री के रूप में उन्होंने सीबीआई द्वारा उन पर (लालू प्रसाद पर) मुकदमा चलाने के लिए प्राप्त मंजूरी की वैधता पर सवाल उठाया था. केंद्रीय जांच एजेंसी ने 28 फरवरी को अदालत को बताया कि आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए उसके पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. यह मामला आईआरसीटीसी के 2 होटलों के संचालन का ठेका एक निजी कंपनी को देने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है.

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रांची के BNR समेत 2 होटलों के रख-रखाव का निजी कंपनी को दिया पट्टा

सीबीआई के आरोपपत्र में कहा गया है कि वर्ष 2004 और वर्ष 2014 के बीच एक साजिश रची गयी थी, जिसके तहत ओडिशा के पुरी और झारखंड की राजधानी रांची स्थित भारतीय रेलवे के बीएनआर (बंगाल नागपुर रेलवे) होटलों को पहले आईआरसीटीसी को ट्रांसफर किया गया. बाद में इनके संचालन और रख-रखाव के लिए दोनों होटलों को पटना स्थित सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को पट्टे पर दे दिया गया.

सीबीआई का आरोप- निविदा प्रक्रिया में की गयी हेराफेरी

सीबीआई ने आरोप लगाया कि निविदा प्रक्रिया में धांधली और हेराफेरी की गयी और सुजाता होटल्स की मदद करने के लिए शर्तों में फेरबदल किया गया. आरोप पत्र में आईआरसीटीसी के पूर्व समूह महाप्रबंधक वीके अस्थाना और आरके गोयल तथा सुजाता होटल्स के निदेशक एवं चाणक्य होटल के मालिक विजय कोचर और विनय कोचर का भी नाम है. डिलाइट मार्केटिंग कंपनी, जिसे अब लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से जाना जाता को भी सुजाता होटल्स के साथ आरोपपत्र में आरोपी बनाया गया है.

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