11 साल का इंतजार खत्म! सुप्रीम कोर्ट का आदेश, झारखंड पुलिस में 800+ अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ
सुप्रीम कोर्ट की तस्वीर : प्रभात खबर
झारखंड पुलिस आरक्षी नियुक्ति 2015 के 800 से अधिक अभ्यर्थियों के लिए 11 साल का इंतजार खत्म हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने शारीरिक दक्षता परीक्षा में डीम्ड क्वालिफाइड मानते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है. यह फैसला मूल याचिकाकर्ताओं पर लागू होगा.
पंकज त्रिपाठी
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रांची: झारखंड पुलिस में आरक्षी नियुक्ति विज्ञापन संख्या 4/2015 के तहत करीब 11 साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे 800 से अधिक अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मूल रिट याचिकाकर्ताओं को शारीरिक दक्षता परीक्षा में डीम्ड क्वालिफाइड मानते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है.
यह मामला जितेंद्र कुमार शर्मा एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य से जुड़ा है. करीब 11 वर्ष पहले याचिकाकर्ताओं ने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा पास की थी, लेकिन इसके बावजूद उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी. इसके बाद अभ्यर्थियों ने न्याय के लिए अदालत का रुख किया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय करोल की अगुवाई वाली पीठ इस मामले की लगातार सुनवाई कर रही थी. तीन जून को अदालत ने सभी याचिकाकर्ताओं की अधिकतम आयु सीमा में छूट देते हुए उनकी नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया था. साथ ही दोबारा मेडिकल और शारीरिक दक्षता परीक्षण कराने को कहा गया था.
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दौड़ में दो ही अभ्यर्थी तय समय में सफल
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद झारखंड पुलिस ने रांची एसएसपी के नेतृत्व में एक बोर्ड का गठन किया. बोर्ड ने अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा के तहत दौड़ आयोजित की. 20 अगस्त को 437 अभ्यर्थी, जबकि 21 अगस्त को करीब 125 अभ्यर्थी शारीरिक परीक्षण में शामिल हुए.
अभ्यर्थियों को 1600 मीटर की दौड़ तीन मिनट में पूरी करनी थी. हालांकि, पुलिस की ओर से करायी गयी दौड़ में महज दो अभ्यर्थी ही निर्धारित समय में दौड़ पूरी कर सके. इसके बाद पुलिस बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर पुलिस मुख्यालय को सौंप दी.
कोर्ट ने कहा- मूल याचिकाकर्ताओं को माना जाए क्वालिफाइड
21 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मामले की स्टेटस रिपोर्ट ली. पुलिस की ओर से शारीरिक दक्षता परीक्षा की जानकारी अदालत को दी गयी. इसके बाद अदालत ने संबंधित मूल रिट याचिकाकर्ताओं को शारीरिक दक्षता परीक्षा में डीम्ड क्वालिफाइड मानते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया और सुधांशु एस. उन्होंने अदालत को बताया कि सफल अभ्यर्थियों में करीब 300 होमगार्ड भी शामिल हैं, जो पिछले 15 वर्षों से राज्य में सेवा दे रहे हैं. अदालत ने इन होमगार्ड कर्मियों को भी समायोजित करने का निर्देश दिया.
आदेश सिर्फ मूल याचिकाकर्ताओं पर लागू
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल मूल रिट याचिकाकर्ताओं पर लागू होगा. इसे भविष्य के मामलों के लिए नजीर नहीं माना जाएगा. वहीं, हस्तक्षेप याचिका दाखिल करने वाले उम्मीदवार इस आदेश का लाभ नहीं ले सकेंगे.
कानून के जानकारों के अनुसार, झारखंड पुलिस की ओर से शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित किए जाने के बावजूद अधिकांश अभ्यर्थियों के निर्धारित समय में दौड़ पूरी नहीं कर पाने का नियुक्ति पर असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मानवीय आधार पर मूल याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है.
11 साल के इंतजार के बाद नियुक्ति की उम्मीद
इस फैसले से उन 800 से अधिक अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति की राह खुल गयी है, जो करीब 11 वर्षों से सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे थे. मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस संजय करोल ने भी पिछले कुछ महीनों में कई महत्वपूर्ण आदेश पारित किए. अंतिम फैसला सुनाने के बाद जस्टिस करोल 22 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गए.
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